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पद, प्रतिष्ठा का नहीं करना चाहिए अहंकार

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कथा सुनाते व्यास रामजी अवस्थी। संवाद - फोटो : AURAIYA
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अजीतमल। गोवर्धन का अर्थ गो संवर्धन है। भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत मात्र इसलिए उठाया था कि पृथ्वी पर फैली बुराइयों का अंत केवल प्रकृति व गो संवर्धन से ही हो सकता है। जब इंद्र को अहंकार हो गया तो श्रीकृष्ण ने यह समझाने का प्रयास किया कि किसी भी व्यक्ति को अहंकार नहीं करना चाहिए। अहंकार मनुष्य के चरित्र को बिगाड़ कर रख देता है। यह प्रवचन कस्बे की सब्जी मंडी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथावाचक रामजी अवस्थी ने किया।
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उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण ने देवराज इंद्र का अहंकार दूर करने के लिए लीला रची थी। तभी से गोवर्धन पूजन की परंपरा आरंभ हुई। बताया कि एक बार इंद्रदेव को अभिमान हो गया। तब लीलाधारी श्री कृष्ण ने एक लीला रची। एक दिन श्रीकृष्ण ने देखा कि सभी ब्रजवासी तरह-तरह के पकवान बना रहे हैं। पूजा का मंडप सजाया जा रहा है और सभी लोग प्रात काल से ही पूजन की सामग्री एकत्रित करने में व्यस्त हैं।
तब श्रीकृष्ण ने योशदा जी से पूछा, ‘मईया’ ये आज सभी लोग किसके पूजन की तैयारी कर रहे हैं। माता यशोदा ने कहा कि पुत्र सभी ब्रजवासी इंद्र देव के पूजन की तैयारी कर रहे हैं। तब कन्हैया ने कहा, कि सभी लोग इंद्रदेव की पूजा क्यों कर रहे हैं। तब माता यशोदा कहती हैं कि क्योंकि इंद्रदेव वर्षा करते हैं और जिससे अन्न की पैदावार अच्छी होती है और हमारी गायों को चारा प्राप्त होता है।
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तब कृष्ण ने कहा कि वर्षा करना तो इंद्रदेव का कर्तव्य है। यदि पूजा करनी है तो हमें गोवर्धन पर्वत की करनी चाहिए, क्योंकि हमारी गायें तो वहीं चरती हैं और हमें फल-फूल, सब्जियां आदि भी गोवर्धन पर्वत से प्राप्त होती हैं। इसके बाद सभी ब्रजवासी इंद्रदेव की बजाए गोवर्धन पर्वत की पूजा करने लगे। इस बात को देवराज इंद्र ने अपना अपमान समझा और क्रोध में आकर मूसलाधार बारिश शुरू कर दी।
तब ब्रजवासी कहने लगे कि यह सब कृष्णा की बात मानने का कारण हुआ है, अब हमें इंद्रदेव का कोप सहना पड़ेगा। भगवान कृष्ण ने इंद्रदेव का अहंकार दूर करने और सभी ब्रजवासियों की रक्षा करने हेतु गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठा लिया। तब सभी ब्रजवासियों ने गोवर्धन पर्वत के नीचे शरण ली। इसके बाद इंद्रदेव को अपनी भूल का अहसास हुआ और उन्होंने श्रीकृष्ण से क्षमा याचना की।

कथा सुनकर तालियां बजाती महिलाएं। संवाद- फोटो : AURAIYA

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