ट्रेन रोकने का प्रयास करते आक्रोशित ग्रामीण।
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कंचौसी में पुलिस हिरासत के बाद हुई युवक की मौत मामले में पुलिस की कहानी पर ग्रामीणों को शक है। वे पुलिस पर कार्रवाई की मांग को लेकर ट्रेन रोकने का प्रयास किए। इससे कंचौसी छावनी में तब्दील हो गया। पुलिस के अधिकारी समझाते रहे लेकिन परिजन का हंगामा जारी रहा। इसी बीच पुलिस कर्मियों ने वीडियो बनाना शुरू किया तो लोगों का आक्रोश बढ़ गया। हालांकि बाद में समझाने बुझाने पर वे शांत हुए।
मृतक अनिल को किशोरी लेने जाने के आरोप में हिरासत में लेने के पांच दिन तक आखिर कंचौसी चौकी पुलिस उसे चौकी में बैठाए रही। जबकि नियमानुसार 24 घंटे के अंदर उसे कोर्ट में पेश करना चाहिए । इसी आधार पर परिजन आरोप भी लगा रहे हैं। उनका आरोप है कि अनिल को छोड़ने के लिए स्थानीय पुलिस 50 हजार रुपये मांग रही थी। रुपये नहीं दिए तो उसकी हत्या कर शव रेल ट्रैक पर डाल दिया गया। कंचौसी पुलिस का कहा कि आरोपी शौच के लिए जा रहा था। भागने के प्रयास से ट्रैक पार करने लगा। इससे ट्रेन कटकर मौत हो गई। ऐसे में उस पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं कि आखिर पुलिस ने उसे बाहर जाने ही क्यों दिया। इसी बात को लेकर गुस्साए लोगों ने ट्रेन रोकने की कोशिश की। हालांकि बाद में समझाने बुझाने पर शांत हो गए।
अपने हिस्से के खेत बेंचकर लड़की के घर रहता था युवक
झींझक। अनिल अपने चार भाइयों में सबसे छोटा था और बाकी तीन भाइयों की शादी हो चुकी है। केवल अनिल ही अविवाहित था। मृतक के भाइयों के अनुसार पिता के नाम पर 10 बीघे जमीन जमीन का बंटवारा चारों भाइयों में बराबर था। अनिल ने अपने हिस्से की डेढ़ बीघा जमीन कंचौसी के एक व्यवसायी को 9 लाख रुपये में बेचने के बाद दिबियापुर थाना में एक गांव में किशोरी के घर रह रहा था। वही किशोरी के पिता ने अपनी पुत्री का विवाह भी उससे करने का भरोसा दे रखा था। पूरा रुपये खत्म होने के बाद जब किशोरी के पिता ने विवाह में आनाकानी की तो अनिल किशोरी को लेकर भाग गया।
मध्यप्रदेश के मंदिर में शादी के मिले अभिलेख
झींझक। अनिल के पास मिले अभिलेखों के अनुसार प्रेमी युगल ने मध्य प्रदेश के मुरैना में स्थित एक मंदिर में 11 नवंबर 2016 को विवाह किया था। इसकी नोटरी वहां के एक नोटरी वकील ने कराई है।