दिबियापुर। विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर रविवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इसमें लोगों को तंबाकू, गुटखा, पान-मसाला और सिगरेट जैसे नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाले गंभीर स्वास्थ्य दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया गया। इस दौरान उपस्थित लोगों को समाज को नशामुक्त बनाने की शपथ दिलाई गई।
कार्यक्रम में अधीक्षक डॉ. विजय आनंद ने कहा कि तंबाकू सेवन वर्तमान समय की सबसे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। तंबाकू और उससे बने उत्पाद न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि उसके परिवार और समाज पर भी नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। बताया कि तंबाकू सेवन के कारण मुंह, गले और फेफड़ों का कैंसर, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह तथा श्वसन संबंधी अनेक बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं।
उन्होंने कहा कि भारत में मुंह के कैंसर के अधिकांश मामले गुटखा और तंबाकू सेवन से जुड़े होते हैं। कार्यक्रम के दौरान डॉ. आनंद ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि भारत में प्रतिवर्ष लगभग 13 लाख लोगों की मृत्यु तंबाकू सेवन के कारण होती है। बताया कि एक वर्ष तक तंबाकू से दूर रहने पर हृदय रोग का खतरा लगभग आधा रह जाता है।
विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर अस्पताल की ओपीडी में विशेष परामर्श डेस्क स्थापित की गई। यहां आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को तंबाकू के दुष्प्रभावों संबंधी जानकारी देने वाले पंपलेट वितरित किए गए।
कैंसर के लक्षणों को न करें नजरअंदाज
अधीक्षक ने लोगों को कैंसर के शुरुआती संकेतों के प्रति सचेत करते हुए बताया कि मुंह में बार-बार छाले होना, सफेद या लाल धब्बे पड़ना, आवाज में बदलाव आना, खाना निगलने में परेशानी होना तथा मुंह का ठीक से न खुलना, कैंसर के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।