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Auraiya News: लोग घरों में कैद, बाहर बेखौफ बंदरों का उत्पात

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औरैया। शहर में बंदरों का उत्पात दिनों-दिन खतरनाक रूप लेता जा रहा है। राह चलते लोगों और स्कूल जाने वाले मासूम बच्चों को बंदर आए दिन निशाना बना रहे हैं। स्थिति यह है कि बंदर सड़कों पर बेखौफ घूम रहे हैं, जबकि लोग घरों में जालियां लगवाकर कैद होने के लिए मजबूर है है। नगर पालिका और वन विभाग की खींचतान के बीच कोई स्थायी समाधान निकलने की उम्मीद फिलहाल नजर नहीं आ रही है।
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शहर के ओमनगर, ब्रह्मनगर, तिलकनगर, विधीचंद्र, नारायनपुर और बनारसीदास मोहल्लों में बंदरों का उत्पात चरम पर है। पूर्व में नगर पालिका ने एक बार अभियान चलाकर बंदरों को पकड़ने की शुरुआत की थी, जिससे लोगों को कुछ राहत मिली थी। अभियान ठप पड़ते ही समस्या फिर गंभीर हो गई। लोग छतों पर जाने से डर रहे हैं और बच्चों को अकेले बाहर भेजने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।
अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार जख्मी हुए लोगों की संख्या
अप्रैल: 87 लोग
मई: 112 लोग
जून: 200 लोग
जुलाई: 175 लोग
अगस्त: 189 लोग
सितंबर: 156 लोग
पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है वैक्सीन : सीएमएस
सीएमएस डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने बताया कि बंदरों के काटने से जख्मी होकर अस्पताल आने वाले मरीजों के इलाज के लिए पर्याप्त मात्रा में एंटी-रेबीज वैक्सीन उपलब्ध है। किसी भी मरीज को दवा या इंजेक्शन की कमी नहीं होने दी जाएगी।
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कोर्ट के आदेश के बाद वन विभाग की जिम्मेदारी : पालिका अध्यक्ष
नगर पालिका अध्यक्ष अनूप गुप्ता का कहना है कि न्यायालय के आदेश के अनुसार अब बंदरों को पकड़ने का काम वन विभाग की ओर से किया जाना है। नगर पालिका अपने स्तर पर नियम अनुसार सहयोग के लिए तैयार है।
सिर्फ घायल बंदर पकड़ता है वन विभाग : डीएफओ
डीएफओ चंद्रप्रताप सिंह ने बताया कि बंदरों को पकड़ने की मुख्य जिम्मेदारी नगर पालिका के ईओ की है। हमारा विभाग केवल उन्हीं बंदरों को पकड़ता है जो घायल होते हैं। इस संबंध में नए दिशा-निर्देश व आदेश भी प्राप्त हो चुके हैं।
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