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अब किसान को रुला रहा प्याज

Sat, 11 Jun 2016 10:49 PM IST
Auraiya, Uttar pradesh, India
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सब्जी बेचकर जताया विरोध
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 रबी के सीजन में गेहूं की पैदावार प्रभावित होने के बाद किसान को उम्मीद थी कि प्याज की उपज से उसे राहत मिलेगी। बारिश ने होने से प्याज की पैदावार भी अच्छी हुई लेकिन मंडी मे प्याज के दामों में आई गिरावट से किसान मायूस हो रहा है। किसानों की माने तो एक बीघा में करीब 70 क्विंटल प्याज की उपज हो हुई है लेकिन मंडी में 240 रुपये प्रति क्विंटल के दाम से फसल की लागत भी नहीं निकल पा रही है।  मंडी में माटी मोल भाव और इफरात में प्याज को लेकर किसानों के हालातों को दर्शाती अमर उजाला की ग्राउंड रिपोर्ट ---
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फेक्ट फाइल --
जिले की कुल भूमि -200652 हेक्टेयर है।
कुल खेती योग्य भूमि - 102.83 वर्ग किमी. है।
प्याज फसल का क्षेत्रफल - 350 हेक्टेयर
बुआई को समय - 20 जनवरी से 28 फरवरी तक
बीज लागत    - 2500 रुपये/हेक्टेयर
डीएपी खाद लागत- 12500 रुपये/हेक्टेयर
यूरिया खाद लागत - 4000 रुपये/हेक्टेयर
कीटनाशक दवा लागत - 3000 रुपये/हेक्टेयर
लेबर खर्च लागत   - 10000 रुपये/हेक्टेयर
कुल फसल लागत  - 32000 रुपये/हेक्टेयर
फसल तैयार अवधि - 90 दिन
फसल पैदावार  - 700 से 800 क्विंटल/हेक्टेयर
जिले में कुल पैदावार - 3150 मीट्रिक टन
मौजूदा मंडी भाव - 240 रुपये/कुंतल

इस हालत में मिले प्याज किसान --
असमय बारिश न होने से महफूज रही प्याज की फसल की इफरात से किसानों की मनोदशा परखने को अमर उजाला ने अजीतमल विकास खंड क्षेत्र के बेला हजयार, पड़रिया और रामनगर गांवों की ओर रुख किया। बेला हजयार गांव के लगभग 20 से 25 किसानों ने प्याज की फसल को अपनी आमदनी का जरिया बना रखा है। गांव के ज्यादातर किसान फसल को खोदकर उसे सुरक्षित करते हुए दिखाई दिए। गांव के किसान ओमकार सिंह अपने खेत पर खुरपी से प्याज की फसल निराई करते हुए मिले तो भुवनेश कुमार राजपूत फसल घर में अपनी फसल को सुरक्षित करने में व्यस्त दिखाई दिए।

इसी तरह पड़रिया गांव के किसान कमलेश यादव अपनी प्याज को बोरे भरकर सुरक्षित स्थानों पर ले जाते देखे गए। रामनगर के किसान रामसेवक राजपूत अपनी पिछमनिया (बुआई के निर्धारित समय के बाद बोई जाने वाली फसल) की खुदाई करते नजर आए। इस बार फसल तो काफी अच्छी हुई है, के सवाल पर रामसेवक ने चेहरे फीकी मुस्कान लाते हुए जवाब दिया कि बेहतर पैदावार की खुशी मनाने से ज्यादा मंडी में प्याज की बेकदरी से कम हो रहे मुनाफे पर स्थित आंसू बहाने की स्थित बन रही है।
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