बिजली विभाग में बिलों में पिछले डेढ़ साल से चल रहे करोड़ों रुपये के हेरफेर के मामले को उजागर करने की अमर उजाला की पहल ने रंग लाना शुरू कर दिया है। मामले में मंडलीय जांच टीम ने कई अफसरों को नोटिस जारी कर नौ दिसंबर तक जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। वहीं पूरे मामले में अधिकारियों का गैर जिम्मेदाराना रवैया जांच का समय पूरा होने पर भारी बना है। इसके एक सप्ताह की डेड लाइन बीतने के बाद भी अभी तक जांच पूरी नहीं हो सकी है।
बिजली बिलों में हेरफेर के मामले में अधिकारियों का असहयोग जांच को प्रभावित कर रहा है। पिछले दिनों शहर आई जांच टीम को अधिकारियों ने डाटा मुहैया नहीं कराया। इससे जांच पूरी करने को तय की गई एक सप्ताह की समय सीमा समाप्त हो गई। लेकिन जबकि जांच अभी भी प्रथम पायदान पर ही लटकी है।
इस बावत जांच टीम द्वारा एक्सईएन व एसडीओ को नोटिस जारी कर संशोधित बिलों का डाटा नौ दिसंबर तक उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि जबाव देने को अभी एक दिन का समय शेष है। यही नहीं लोकल स्तर से बिजली अधिकारियों द्वारा प्राइवेट कर्मचारियों पर शक की तलवार लटकाए जाना भी जांच टीम के गले नहीं उतर रहा है। वहीं जांच के लिए आई टीम की मौजूदगी के दौरान कार्यालय से बाबू का गायब हो जाना पूरे मामले में घालमेल को दर्शा रहा है।
एक्सईएन पंकज शर्मा व एसडीओ अरविंद सिंह को नोटिस जारी कर जानकारी मांगी गई है। इसके लिए नौ दिसंबर की समय सीमा निर्धारित की है। इस समयांतराल में यदि मांगी गई सूचना नहीं दी जाती है तो कड़े कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल अभी तक की जांच में यह मामला काफी दिनों से चलता प्रतीत हो रहा है। पूरे घटनाक्रम से पर्दा उठाने में अभी थोड़ा समय और लगेगा। पूरा प्रयास है कि निर्दोष न फंसे और दोषी किसी भी सूरत में न बचने पाएं।
एएन दीक्षित, सुपरिंटेंडेंट/ जांच टीम प्रभारी