फोटो-11एयूआरपी 05- फफूंद रोड पर गड्ढों के बीच आवागमन करते वाहन सवार। संवाद
औरैया। लंबे अरसे के बाद परिवहन विभाग के औरैया डिपो को जमीन मिली थी। उम्मीद थी कि जल्द ही इस पर विस्तार कर यात्रियों को सहूलियतें मिलेंगी लेकिन इस पर पानी फिरता नजर आ रहा है। जिन कब्जेदारों से ये जमीन खाली कराई गई थी वो कोर्ट चले गए हैं। इससे परिवहन को मिली जमीन पर विकास परियोजनाएं धरातल पर उतारने में अड़ंगा लग गया है। जमीन निचली होने की वजह से वहां पर दलदल की स्थिति बन गई है। ऐसे में बसें खड़े होने में भी दुश्वारी हो रही है।
करीब छह माह पहले जिला प्रशासन ने शहर के बीचों-बीच डिपो से सटी हुई पेच कपास की जमीन को कब्जा मुक्त कराया था। यहां पर लोगों के कई अवैध कब्जे थे जिन्हें बुलडोजर से खाली करा दिया गया था। कागजों में यह जमीन 6.52 एकड़ है। इसकी कीमत 200 करोड़ से ज्यादा की आंकी गई है। इस जमीन को नगर पालिका के सुपुर्द कर दिया गया था। डिपो को बेहतर बनाने के लिए इस जमीन का डिपो से सटा हुआ कुछ हिस्सा फौरी तौर पर बसों के खड़े करने के लिए दे दिया गया था।
छह माह से यहां पर बसें खड़ी हो रही है लेकिन बढ़े हुए दायरे के बाद भी इस खाली पड़ी जमीन पर परिवहन विभाग की ओर से सहूलियतें खड़ी नहीं की जा सकी हैं। इसके पीछे की वजह यह है कि डिपो को यह जमीन कागजों में मुहैया नहीं हो सकी है। यह प्रयास होता इससे पहले कब्जेदार कोर्ट चले गए हैं। ऐसे में डिपो को मिली इस जमीन का कुछ हिस्सा महज बसों की पार्किंग तक सीमित है। बारिश के चलते यहां पर जलभराव हो गया है। ऐसे में यहां पर बसों को खड़ा करने में भी दिक्कत आ रही है। जिला प्रशासन की ओर से इस जमीन को कब्जामुक्त करने का किया गया अभूतपूर्व प्रयास फिलहाल डिपो को बेहतर बनाने के काम नहीं आ सका है।
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वर्जन
बसों की पार्किंग के लिए मिली जगह कागजों में अभी नहीं मिल सकी है। उधर, इस जमीन से हटाए गए कब्जेदार कोर्ट चले गए हैं। कागजों में यह जमीन मिले तो सहूलियतों के प्रस्ताव बनाकर मुख्यालय भेजे जाएंगे।
-अपर्णा मीनाक्षी, एआरएम औरैया डिपो