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Auraiya News: डेढ़ दशक तक जाते रहे नोटिस पर नोटिस, डॉक्टरों ने नहीं दिया जवाब

Tue, 13 Jan 2026 11:22 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
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औरैया। लंबे समय से अनुपस्थित चल रहे जिले के पांच डॉक्टरों पर बर्खास्तगी की कार्रवाई होने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हलचल बढ़ गई है। पुरानी फाइलें खोली जाने लगी हैं। अनुपस्थित चल रहे अन्य डॉक्टरों को नोटिस जारी करने की तैयारी है।
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वहीं, जिन पांच डॉक्टरों पर कार्रवाई की गई है, वे सभी नई नियुक्ति पर आए थे। कुछ दिन काम किया फिर बिना कारण बताए चले गए। स्वास्थ्य विभाग उन्हें नोटिस पर नोटिस भेजता रहा, पर उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं दिया गया।

जिला अस्पताल के डॉ. प्रदीप कुमार की आखिरी उपस्थिति तीन मई 2014 को दर्ज मिली। चार मई से अभी तक वह अस्पताल नहीं आए। हर साल उन्हें नोटिस जारी होता रहा, पर उनकी ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। बिधूना की गूरा पीएचसी में नियुक्त डॉ. आलोक कुमार चार अप्रैल 2012 से गायब हैं। उन्हें नोटिस देने के साथ ही व्यक्तिगत संपर्क भी किया गया, पर वह नहीं लौटे। न उनकी ओर से कोई मेडिकल लगाया गया, न ही इस्तीफा दिया गया।
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सीएचसी अजीतमल से डॉ. शालिनी एक मार्च 2011 व डॉ. प्रभा पाल एक दिसंबर 2014 से अनुपस्थित चल रही थीं। इसके अलावा सहार की पीएचसी घसारा में नियुक्त किए गए डॉ. अजय राजपूत आखिरी बार दो जून 2011 को आए। ये सभी चिकित्सक नई नियुक्ति पर आए थे। सभी ने कुछ समय कार्य किया, इसके बाद नहीं आए। स्वास्थ्य विभाग की ओर से हर साल दो बार इन्हें नोटिस भेजे गए, पर किसी ने जवाब देना जरूरी नहीं समझा।

सात साल बाद भी गायब डॉक्टर का नाम चढ़ा
जिला अस्पताल में नियुक्त जनरल फिजीशियन डॉ. निरूपम सिंह आखिरी बार पांच जुलाई 2018 को आए। बताया जाता है कि उनका यहां कोई विवाद हो गया, इसके बाद वह कानपुर चले गए। इसके बाद फिर नहीं लौटे। जिला अस्पताल की ओर से अभी भी उनको नोटिस भेजे जाते हैं। सात साल बीतने के बाद भी उनका नाम अस्पताल की सूची में दर्ज है।
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चार और चिकित्सक रडार पर
स्वास्थ्य विभाग ने पुरानी फाइलें पलटीं तो चार और डॉक्टरों का नाम सामने आया है, जो पांच साल से ज्यादा समय से अनुपस्थित चल रहे हैं। इनको नोटिस जारी करने की तैयारी की जा रही है। इनकी सूची भी शासन को भेजी जा सकती है।

सभी चिकित्सक लंबे समय से अनुपस्थित थे। न इनके द्वारा इस्तीफा दिया गया, न नोटिस का जवाब। इन सभी की ओर से अवकाश का प्रार्थना पत्र नहीं दिया गया, इसलिए इनका वेतन बंद करा दिया गया था।
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-डॉ. सुरेंद्र कुमार, सीएमओ
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