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Auraiya News: हादसों से सबक नहीं, नियम ताक पर रखकर चल रहीं स्लीपर बसें

Mon, 27 Oct 2025 11:11 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
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फोटो-27एयूआरपी01- जालौन चौराहे से निकलती स्लीपर बस। संवाद
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औरैया। स्लीपर बसों में आग लगने की घटनाएं अब आम होती जा रही हैं। हर दिन ये घटनाएं सुर्खियां बन रही हैं। ताजा मामला रविवार को लखनऊ से सामने आया है। बावजूद सरकारी मशीनरी की ओर से इन हादसों का सबक नहीं लिया जा रहा है। आलम यह है कि सड़क पर मानकों को ताक पर रखकर स्लीपर बसें फर्राटा भर रही हैं। यात्रियों को सहूलियत देने के नाम पर इन बसों को किया जा रहा मॉडीफिकेशन ही यात्रियों के लिए काल बन रहा है। किसी बस की ऊंचाई बढ़ाई जा रही है, तो किसी में सीटें व स्लीपर बेड बढ़ा दिए जा रहे हैं। ऐसे में फिटनेस के नियम दरकिनार किए जा रहे हैं। जिले में हाल ही में ऐसी 50 बसों पर कार्रवाई भी की गई है।
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सड़कों पर दौड़तीं स्लीपर बसें अब लोगों के सफर का सुरक्षित साधन नहीं रहीं बल्कि हादसों को न्योता देने का जरिया बनती जा रही हैं। आएदिन इन बसों में आग लगने, ब्रेक फेल होने या ओवरलोडिंग जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। इसके साथ ही बसों में आग लगने की घटनाएं हो रही है। जिम्मेदार इन घटनाओं के पीछे तकनीकि कमी बताते हैं। साथ ही साथ फिटनेस के साथ हो रहे खिलवाड़ को भी जिम्मेदार ठहराते हैं। इसके बावजूद परिवहन विभाग और प्रशासन सिर्फ खानापूर्ति तक सीमित रह गया है। हादसों के बाद जांच के नाम पर रिपोर्ट बनती है और कुछ दिनों में मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।
कुछ दिन परिवहन विभाग की ओर से सख्ती दिखाते हुए बसों पर कार्रवाई भी की जाती है। लेकिन मामले के ठंडे बस्ते में जाते ही मुंह मोड़ लिया जाता है। नियमों के मुताबिक, किसी भी यात्री बस में दो दरवाजे (एक चढ़ने-उतरने के लिए और दूसरा आपात निकास के रूप में) होना अनिवार्य है। साथ ही बस में फायर एक्सटिंग्विशर, इमरजेंसी खिड़की और रजिस्टर नंबर सहित वैध परमिट होना चाहिए लेकिन स्लीपर बसों में सीटों को हटाकर स्लीपर केबिन बना दिए जाते हैं। इससे न केवल जगह कम हो जाती है बल्कि आपातकालीन स्थिति में निकलने का रास्ता भी बंद हो जाता है। राजमार्गों पर चल रहीं कई बसें बिना फिटनेस सर्टिफिकेट और उचित सुरक्षा उपकरणों के संचालित की जा रही हैं। हाल ही में कई राज्यों में स्लीपर बसों में आग लगने से यात्रियों की मौत हुई लेकिन जिम्मेदार विभागों की आंखें अब तक बंद हैं।
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एक माह में 50 बसों में पकड़ी गईं खामियां
परिवहन विभाग के मुताबिक अक्तूबर माह में 50 स्लीपर बसों को पकड़ा गया है। जिन पर जुर्माना किया। साथ ही कुछ बसों को सीज भी किया गया। इनमें किसी में सीटें फिटनेस से कहीं ज्यादा रहीं। वहीं मॉडीफिकेशन भी पाया गया। किसी बस में इमरजेंसी गेट को स्थाई तौर पर बंद कर दिया गया था। वहीं, कुछ में तो अग्निशमन यंत्र तक नहीं थे।
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बस की हर सीट पर मोबाइल चार्जिंग पॉइंट
स्लीपर बसों में यात्रियों को सहूलियत देने के विशेष इंतजाम मॉडीफिकेशन कर किए जाते हैं। लोगों की दिनचर्या में शामिल हो चुके मोबाइल का भी इसमें ध्यान रखा जाता है। प्रत्येक सीट पर मोबाइल चार्ज करने के लिए बसों में पॉइंट दे दिए गए हैं। इनमें स्पार्किंग की आशंका रहती है। साथ ही पर्दों के जरिए बस में केबिन का लुक दिया जाता है। इन पर्दों के जल्दी आग पकड़ने की आशंका रहती है। जानकार बताते हैं कि बसों में सहूलियत देने वाला मॉडीफिकेशन का काम ही हादसों का कारण बन रहा है। हालांकि सरकारी मशीनरी इसे तकनीकि कारणों से हादसे होने की वजह बताती है।

गत माह 50 बसों पर हुई कार्रवाई
स्लीपर बसों में फिटनेस को लेकर होने वाली अनदेखी के लिए लगातार चेकिंग अभियान चलाया जाता है। पिछले एक माह में 50 बसों पर कार्रवाई भी की गई है। जुर्माने के साथ ही बसों को सीज भी किया गया है। फिटनेस की खामी को लेकर सावधानी बरती जा रही है। -आनंद कुरील, पीटीओ

खामियों पर नजर रख रोकी जा सकती घटनाएं
स्लीपर बसों में आग लगने की घटनाओं में कई वजह हो सकती हैं। इसमें बस के तेज चलने पर टायर व सड़क के बीच घर्षण, इंजन के गर्म होने के साथ ही चिंगारी निकलना, साथ ही बिजली के तारों में स्पार्किंग भी एक वजह हो सकती हैं। इन खामियों पर लगातार नजर रखी जाए तो आग लगने की घटनाओं को रोका जा सकता है। -तेजवीर सिंह, मुख्य अग्निशमन अधिकारी
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