बीती 28 दिसंबर को हुए सियाराम हत्याकांड में पकड़े गए आरोपियों के बयान से मृतक के परिजनों ने भ्रामक बताया है। पीड़ित परिवार का कहना है कि हत्या का बदला लेने के लिए नहीं बल्कि गांव में वर्चस्व कायम करने के लिए सियाराम की हत्या की गई थी। 0
सियाराम के परिजन आदेश कुमार, देवेंद्र कुमार, भागीरथ, नेमराज समेत एक दर्जन ग्रामीणों ने एसपी को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि 28 दिसंबर को सियाराम उर्फ पट्टू निवासी करौंधा बिझाई की औरैया के बिरिया भट्टा के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। सियाराम ने तीन बार प्रधानी का चुनाव लड़ा और वे हमेशा गरीबों के हित की बात करते थे।
तीनों बार प्रधानी चुनाव वे हार गए। परंतु किसी को भी धमकी नहीं दी। पुलिस की गिरफ्त में आए हत्यारोपी शीटू के चाचा सुरेंद्र की हत्या सड़क दुर्घटना में हुई थी। परिजनों ने दावा किया कि यह बात पुलिस की विवेचना में स्पष्ट भी हो चुका है। इसके बावजूद शीटू एवं अन्य दो हत्यारोपियों ने गांव में वर्चस्व कायम करने के लिए सियाराम की हत्या कर दी है।
अब शीटू एवं उसके साथी पुलिस को गुमराह कर रहे हैं कि उन्होंने सियाराम की हत्या अपने चाचा की हत्या का बदला लेने के लिए की है। जबकि सियाराम की हत्या केवल वर्चस्व को लेकर की गई है। ग्रामीणों एवं मृतक के परिजनों का आरोप है कि सीटू के पिता तुलाराम का आपराधिक इतिहास रहा है। कई घटनाओं में तुलाराम की संलिप्तता रही है।
मौत के 11 दिन बाद हुआ बेटा
नगर के पास स्थित ग्राम करौंधा निवासी सियाराम राजपूत ने बच्चे की चाहत में दूसरी शादी की थी। परंतु सियाराम अपने बच्चे को देख नहीं पाया। परिजन बताते हैं कि सियाराम की हत्या 28 दिसंबर को हुई। जबकि उनकी दूसरी पत्नी आरती ने 11 दिन बाद सात जनवरी को स्वस्थ बेटे को जन्म दिया। परिजनों के अनुसार 15 वर्ष पूर्व आदमपुर अजीतमल से सियाराम की शादी हुई थी। इलाज के बावजूद कोई बच्चा न होने पर दूसरी शादी दबाहा तिर्वा कन्नौज से की थी। आरती का कहना है कि ईश्वर उसे एवं उसके बेटे को न्याय अवश्य देगा।