डीएम के गोद लिए गांव लछियामऊ वासियों को आज भी समस्याओं से निजात मिलने की उम्मीद है। गांव को गोद लिए छह माह बीतने के बाद भी गांव की गलियों से कूड़े के ढेर नहीं हटे हैं।
आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को पौष्टिक आहार नहीं मिल रहा है। पौष्टिक भोजन, टीकाकरण के नाम पर एएमएम सेंटर में लापरवाही बरती जा रही है। डीएम साहिबा के गोद लिए गांव का यह हाल है तो अन्य गांवों का क्या होगा इसका तो भगवान ही मालिक ...
ब्लाक सहार की सीमा से जुड़े गांव का पूर्वी किनारा कानपुर देहात की ग्राम पंचायत रानेपुर से जुड़ता है। लछियामऊ की आबादी छह हजार के आसपास है। यह क्षेत्र के रंजीनपुर डेरा, मुरलीपुर, धौकलपुर मडै़या के रूप में पांच किलोमीटर तक फैला है। क्षेत्र में गंदे पानी के निकासी का उचित प्रबंध नहीं है।
गांव के भूरे तिवारी, सियाराम यादव, सोनू वर्मा, पवन रावत, भागवती, सुनीता देवी, भागवती देवी, गिरीश कुमार ने बताया कि डीएम माला श्रीवास्तव ने इस गांव में चौपाल लगाकर गोबर के ढेर हटवाए जाने के निर्देश दिए थे, लेकिन निर्देशों पर अमल आजतक नहीं हो सका है।
वहीं कुपोषित बच्चों की देखरेख के लिए एएनएम सेंटर भी समय पर नहीं खुलता है।
लोगों का आरोप है कि ग्राम पंचायत अधिकारी राजेंद्र सिंह व प्रधान श्रीमती केतकी देवी इस गांव में कोई विकास कार्य न कराकर मजरा रंजीतपुर का विकास कार्य करा रही हैं। खाद के गड्ढे़ मांगने पर लोग सार्वजनिक जमीन न होने की बात कह लौटा देते है। यह क्षेत्र सांसद डिपंल यादव के संसदीय क्षेत्र में भी आता है।