सपा का गढ़ माने जाने वाले औरैया में बीजेपी को सालों से जमीन की तलाश थी। 1991 में राम मंदिर मुद्दे की लहर में भी भाजपा इस गढ़ को नहीं भेद पाई थी। तब सिर्फ एक सीट भाजपा को मिली थी। दो सीटें सपा ने जीती थीं।
1991 में राम मंदिर मुद्दे की लहर में अजीतमल सीट से भाजपा के छक्की लाल कोरी ही जीत दर्ज करा सके थे। औरैया से इंद्रपाल व बिधूना से धनीराम वर्मा ने मुलायम की अगुवाई वाली जनता पार्टी का डंका बजाया था। राम मंदिर की इस लहर के बाद बीजेपी जिले में सिमटती चली गई। 1996 में जनता ने तीनों पार्टियों को एक-एक सीट पर जीत दिला दी। औरैया सीट से भाजपा के लाल सिंह वर्मा जीते थे। बिधूना में सपा के धनीराम ने विजय पाई। अजीतमल से बसपा के मोहर लाल अंबाड़ी जीते थे। 1996 के बाद भाजपा फिर पिछड़ती चली गई। कई बार उम्मीदवारों की जमानत भी नहीं बची। इस बार मोदी लहर में भाजपा ने सपा के गढ़ को तहस नहस कर दिया। भाजपा ने सपा के गढ़ की तीनों सीटों पर परचम फहरा दिया है।
बीस साल से वनवास काट रहे थे भाजपाई
जिले में भाजपा की हालत बहुत ठीक नहीं थी। बैठकों से लेकर कार्यक्रमों तक में चुनिंदा भाजपाई ही दिखते थे। 1996 के बाद से भाजपा का उम्मीदवार नहीं जीता। जिले में 20 साल से भाजपा वनवास काट रही थी। जिले में संगठन कमजोर था लेकिन समर्पण पूरा था।
सांसद पूरे चुनाव में रहे अदृश्य
2014 में मोदी लहर में इटावा सीट से बीजेपी के अशोक दोहरे चुनाव जीते थे। यह बसपा सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे थे। बसपा छोड़कर बीजेपी में आए थे। विधानसभा के पूरे चुनाव में सांसद की भूमिका को कोई नहीं जान पाया। वह चुनाव कार्यक्रमों में भी नहीं दिखे।