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लाखों खर्च के बाद भी शौचालयों में लगे ताले

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सामुदायिक भवन व शौचालय में पड़ा ताला। संवाद - फोटो : AURAIYA
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औरैया। गांव में साफ-सफाई व खुले में शौच पर अंकुश लगाने के लिए सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कराया गया है, लेकिन सदर ब्लॉक की ग्राम पंचायत में 70 से 80 फीसदी शौचालय बंद पड़े हैं। लाखों रुपये निर्मित शौचालयों का प्रयोग न होने से इन उपयोगिता पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।
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सदर ब्लॉक की 95 ग्राम पंचायतों में 91 में सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कराया गया है। जिसमें 12 सामुदायिक शौचालय निर्माणाधीन हैं। 79 सामुदायिक शौचालय चालू हालत में है। जिला पंचायत राज अधिकारी संदीप वर्मा ने कहा कि सामुदायिक शौचालयों को खोलने के लिए सुबह पांच बजे से दिन में दस बजे व शाम को चार से सात बजे तक खोलने के निर्देश दिए गए हैं। जहां भी शौचालय बंद मिलेंगे, संबंधित के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
विशेष दिनों में ही खुलता है शौचालय
औरैया। ग्राम पंचायत गोहना के सामुदायिक भवन के अंदर ही सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया गया है। जिसका निर्माण हुए करीब सात-आठ माह बीत चुके हैं। शुक्रवार सुबह 9:15 बजे सामुदायिक शौचालय व सामुदायिक भवन का गेट बंद मिला। ग्रामीणों ने बताया कि अधिकांश समय यहां ताला लटका रहता है। अधिकारियों के निरीक्षण अथवा किसी कार्यक्रम के दौरान ही इसे खोला जाता है।
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शौचालय खोलने के नाम हो रही खानापूरी
ग्राम पंचायत कुल्हुपुर का सामुदायिक शौचालय का निर्माण हुए एक वर्ष बीत चुका है। शुक्रवार सुबह साढ़े नौ बजे सामुदायिक शौचालय बंद मिला। ग्रामीणों ने बताया कि सामुदायिक शौचालय खोलने के नाम पर खानापूरी की जाती है। सुबह-शाम आधा एक घंटे के लिए खोलकर बंद कर दिया जाता है। जिससे ग्रामीण खुले में शौच करने को विवश हैं।
एक वर्ष से बंद पड़ा शौचालय
ग्राम पंचायत रौतियापुर के सामुदायिक शौचालय पिछले एक वर्ष से बंद पड़ा है। गांव की अनोखी देवी ने बताया कि शुरूआत में एक महीने तक इसका संचालन किया गया, लेकिन इसके बाद ग्राम प्रधान पति केयर टेकर सुनंदा से चाबी लेकर चले गए। तब से यह शौचालय बंद पड़ा है। केयर टेकर को उसके एक माह का मानदेय भी नहीं दिया गया।
केवल तीन माह का मिला मानदेय
ग्राम पंचायत चिरूहूली का सामुदायिक शौचालय खुला मिला। यहां की केयर टेकर पुष्पा ने बताया कि सामुदायिक शौचालय का प्रयोग हो रहा है। उसने बताया कि करीब 12 माह से सामुदायिक शौचालय की देखरेख कर रही है, लेकिन उसे अभी तक मात्र तीन माह का मानदेय मिला है।

जलोखर कुल्हूपुर स्थित शौचालय में लटकता ताला। संवाद- फोटो : AURAIYA

एक साल से बंद पड़ा सामुदायिक शौचालय। संवाद- फोटो : AURAIYA

शौचालय के बाहर खड़ी केयर टेकर पुष्पा। संवाद- फोटो : AURAIYA

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