फोटो-27एयूआरपी 24- खेत में लहलहाती धान की फसल। संवाद
औरैया। एकाएक मौसम में आए बदलाव के बाद शनिवार शाम बारिश ने किसानों की धड़कनें बढ़ा दीं। खासतौर पर बाली पर आ चुकी धान की फसल का बारिश और तेज हवा से खेत में गिरने की संभावना है, हालांकि हवा के शांत रुख ने किसानों का साथ दिया। नहीं तो फसल गिरने से किसानों की उपज खासा प्रभावित होती। रात तक आसमान में छाए रहे घने बादलों ने किसानों की धुकधुकी बढ़ा रखी है।
जिले में धान का रकबा दो लाख हेक्टेयर के करीब है। बड़े पैमाने पर निचली जमीनों पर धान की फसल होती है। इन दिनों फसनों पर बाली है। तेज बारिश के बीच हवा चलने से फसल गिरने की संभावना है। किसानों की माने तो पौध पर वजन बढ़ चुका है। ज्यादा पानी और तेज हवा से फसल खेत में ही पट हो जाएगी। ऐसे में धान का रंग काला पड़ जाता है। धान की उपज का काला रंग हो जाने से अच्छा भाव भी नहीं मिलता है। साथ ही साथ खेत में पट हो जानी फसल में उत्पादन भी घट जाता है।
शनिवार सुबह आसमान में घने बादल छाए तो किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गईं। दोपहर बाद साढ़े तीन बजे के करीब एकाएक जिले के कुछ हिस्सों में तेज बारिश हुई। तापमान में गिरावट के साथ ही लोगों ने गर्मी से राहत पाई। हालांकि 10 मिनट के बाद यह बारिश थम गई। वहीं देर रात तक घने बादल छाए रहे। मौसम वैज्ञानिक डॉ. रामपलट ने बताया कि एक अक्तूबर के बाद बारिश होने की संभावना है। फिलहाल छुटपुट बारिश होने के आसार है।
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क्या बोले किसान-
फसल पटी तो होगा घाटा
फोटो-26एयूआरपी 25 - अशोक कुमार। संवाद
किसान अशोक कुमार ने बताया कि यदि बारिश के साथ तेज हवा चली तो धान की फसल खेत में ही गिर जाएगी। ऐसे में उत्पादन गिर जाने से फसल घाटे में चली जाएगी।
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तेज हवा न चले तो होगी बचत
फोटो-26एयूआरपी 26- आदेश कुमार। संवाद
किसान आदेश कुमार ने बताया कि कुछ तेज हवा के साथ बारिश न हो तो धान की फसल मुनाफेदार होगी। यदि ऐसा हो गया तो अरमानों पर पानी फिर जाएगा।