औरैया। पेड़ से आम तोड़ने पर 10 साल के बालक का अंगूठा काटने वाले अभियुक्त प्रेमशंकर दीक्षित को विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट विकास गोस्वामी ने उम्रकैद की सजा सुनाई।
कोर्ट ने दोषी पर 22 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने अर्थदंड की आधी धनराशि पीड़ित को अदा करने का भी आदेश दिया। दोषी को इटावा जेल भेज दिया गया।
अभियोजन के अनुसार फफूंद थाना क्षेत्र के गांव भैसोली निवासी अवध बिहारी ने नौ साल पहले बेटे पर हमले की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें उन्होंने बताया था कि 10 वर्षीय बेटा अंशू चार जुलाई 2016 की दोपहर दो बजे गांव निवासी प्रेमशंकर दीक्षित के पेड़ पर चढ़कर आम तोड़ने लगा था।
इस बात से गुस्साए प्रेमशंकर ने धारदार हथियार से उस पर वार कर दिया, इसमें बेटे का अंगूठा कट गया। बेटा घर पहुंचा और परिजन को घटना की जानकारी दी। परिजन आरोपी के घर पहुंचे तो उसने गाली-गलौज कर धमकी देकर भगा दिया। पुलिस ने मामले की विवेचना की और साक्ष्य के अभाव में फाइनल रिपोर्ट (एफआर) कोर्ट में प्रेषित की। इसका परिजन ने विरोध किया।
कोर्ट ने परिजन की बात स्वीकार कर अपराध का संज्ञान लिया और प्रकरण को स्टेट केस के रूप में प्रचलित किया। पीड़ित के अनुसूचित जाति से होने के चलते एससी-एसटी एक्ट व अंग-भंग करने की धाराओं का मुकदमा विशेष न्यायालय में चला।
अभियोजन ने मामूली बात पर इतने बड़े अपराध को अंजाम देने वाले अभियुक्त के खिलाफ कठोर कार्रवाई की बहस की। दोनों पक्षकारों को सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश विकास गोस्वामी ने इस अपराध के लिए प्रेमशंकर को दोषी माना और उम्रकैद की सजा सुनाई।