औरैया। प्रदेश सरकार ने औरैया जिला अदालत व आवासीय भवनों के लिए 16.56 हेक्टेयर भूमि खरीदने का फैसला किया है। भूमि खरीदने के लिए 67 करोड़ रुपये भी मंजूर कर दिए।
मालूम हो कि वर्ष 2001 में औरैया को जिला घोषित किया गया था। तब से अभी तक यहां छोटे से भवन से जिला अदालत का संचालन किया जा रहा है। जबकि इसी के साथ बने कन्नौज जिले में जिला एवं सत्र न्यायालय की स्थापना हो चुकी है। इस भेदभाव पूर्ण रवैए को लेकर पिछले माह औरैया बार एसोसिएशन की ओर से हाईकोर्ट इलाहाबाद में जनहित याचिका दायर की थी। न्यायालय ने इस याचिका पर प्रदेश सरकार को इस भेदभाव को लेकर काउंटर तलब किया। जिसकी सुनवाई 31 मई 2018 को होनी थी, जो कि बढ़ गई। मुख्य न्यायाधीश सुनीत कुमार की बेंच में डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन(डीबीए) की तरफ से एडवोकेट अनूप त्रिवेदी व सरकार की ओर से एडीशन जनरल एमसी चतुर्वेदी की तत्परता से सरकार हरकत में आई। प्रदेश सरकार के सचिव उमेश कुमार ने उच्च न्यायालय में महा निबंधक को पत्र लिखकर स्वीकृत बजट के निर्णय से अवगत कराया। महा निबंधक उच्च न्यायालय इस स्वीकृत धनराशि आहरित कर इसका उपयोग 31 मार्च 2019 तक अवश्य करवा लेंगे। डीबीए अध्यक्ष अशोक अवस्थी, महामंत्री मान सिंह पाल व प्रवक्ता शिवम शर्मा ने बताया कि जिला न्यायालय की ककोर में स्थापना के लिए 16.5 हेक्टेयर भूमि का चयन किया जा चुका है, लेकिन इस भूमि को क्रय करने के लिए प्रेषित बजट किसी भी सरकार में स्वीकृत नहीं हुआ। इस पर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई। डीबीए ने इसे प्रमुख आधार बनाया कि साथ बनें जिला में जिला जजी की स्थापना कर दी गई, लेकिन औरैया जिले की उपेक्षा की जा रही है। इसका सकारात्मक असर हुआ। भूमि क्रय के लिए पहले चार करोड़ 63 लाख 42 हजार 981 रुपये स्वीकृत कर शासन ने प्रेषित किए। अब शेष 62
करोड़ 99 लाख 29 हजार रुपये स्वीकृत होने से भूमि क्रय के लिए संपूर्ण धनराशि 67 करोड़ 62 लाख 72 हजार रुपये स्वीकृत हो गई है। इस आशय की एक प्रति डीएम को भी भेजी गई है।