जीवन में ख्याति तभी मिलती है जब हम अपने कर्म और वचनों की रक्षा करें। हमारा धर्म माता-पिता के आदर्श और उनके वचनों की रक्षा होनी चाहिए। जिस दिन हम इस बात को समझ जाएंगे। हमारा, समाज कल्याण का सभी का कल्याण होगा। शहर के ओम नगर मोहल्ले में चल रहे श्री रुद्घ महायज्ञ तथा श्रीमद भागवतकथा में आचार्य आदेश तिवारी ने भक्तों को संबोधित किया।
कहा कि पिता के वचनों की रक्षा के लिए भगवान श्रीराम ने 14 वर्ष का वनवास काटा। तो वहीं जनक की प्रतिज्ञा पूरी करने के लिए शिव धनुष का भंजन किया। मानव जीवन का मुख्य उद्देश्य वचन और कर्म की रक्षा होनी चाहिए। लेकिन आज मानव लोभवश अपने कर्म और वचन से पीछे हट रहा है। वह भौतिकता से सुख में झूठ का सराहा ले रहा है। यह हमें पतन की ओर लेकर जाएगा। हमारे घर, परिवार की सुख शांति को हमसे छीन लेगा। हमें जीवन में कर्म प्रधान होना चाहिए। यह कर्म सत्य की दिशा में होना चाहिए।
कथा श्रवण के दौरान श्यामू बाजपेयी, राजाबाबू तिवारी, मनोज मिश्रा, किशन मिश्रा, अनूप तिवारी, दीपू शर्मा, सीटू तिवारी आदि मौजूद रहे।