मौसम की मार और कीटों के हमलों से सब्जी उत्पादक किसान परेशान हैं। सब्जी फसल की दिन-रात निगरानी के बावजूद किसान अपनी सफल को बचा नहीं पा रहे हैं। आजकल बैगन की फसल में झुलसा और धब्बा रोग से किसान आहत हैं। दयालपुर, जरुलिया, नंदगांव, मढ़ापुर के किसानों का कहना है कि इस बीमारी से रोजाना 10 से 15 किलो बैगन खराब हो रहा है।
पत्ती पर धब्बा रोग
कृषि वैज्ञानिक डा. राजेश राय बताते हैं कि बैंगन में चार प्रकार से धब्बा रोग पाए जाते हैं। इस रोग से ग्रहित होने पर फल में भूरे धब्बे बनने लगते हैं। यह धब्बे आपस में मिलकर धीरे-धीरे फल को गलाना शुरू कर देते हैं। कुछ ही दिनों में फल बेकार हो जाता है। इसकी रोकथाम के लिए बैगन की पौध में खरपतवार की रोकथाम नियमित रूप से करते रहना चाहिए। रोगी पत्तियों को तोड़ कर जला देना चाहिए। सथ ही डाइथेन जेड - 78 के घोल का 7-8 दिन के अंतराल पर छिड़काव करना चाहिए।
बैगन में झुलसा रोग
कृषि वैज्ञानिक डा. राजेश राय बताते हैं कि यह रोग फोमोप्सिस वेकसेंस नामक हानिकारक कवक से पैदा होता है। इससे पौधों की पत्तियों पर भूरे धब्बे बन जाते हैं। यह अनियमित आकार के धब्बे पत्तियों के किनारे दिखाई देते हैं। रोगी पत्त्तियां पीली पर पड़कर सूख जाती हैं। यह एक मृदाजनित रोग है। जिसके कारण पौधे झुलस कर मर जाते हैं। इसकी रोकथाम के लिए पौधों को 0.2 प्रतिशत कैप्टान का 7-8 दिन में छिड़काव कर रोग मुक्त करें। रोगग्रस्त पौधों को उखाड़ कर जला दें। रोगप्रतिरोधी किस्में जैसे ‘पूसा भैरव’ का चयन करें।