औरैया डिपो से 68 बसों का संचालन होता है। यह बसें कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज, इटावा, दिल्ली, आगरा, झांसी, शाहजहांपुर समेत आदि रूटों पर चलती हैं। औरैया डिपो का मिनी मुख्यालय इटावा है। बात करें इटावा व कानपुर रूट की तो इस रूट पर परिवहन निगम का एचपी व शताब्दी ढाबे से अनुबंध है।
एचपी सिकंदरा, कानपुर देहात व शताब्दी ढाबा औरैया सीमा में आता है। कुछ रोडवेज बसों के चालक-परिचालक बसों को यहां पर रोकते हैं, मगर अधिकतर मनचाहे व अनाधिकृत ढाबों पर बसों को रोक रहे हैं। वर्कशॉप में अनुबंधित ढाबे पर बस रोकने की रसीद जमा कर कार्रवाई से बच निकलते हैं।
एआरएम आरएस चौधरी ने बताया कि बसों में यात्री के रूप में चेकिंग टीम के सदस्यों को भेजा जाएगा। अनाधिकृत ढाबों पर बस खड़ी होने के दौरान वीडियो और फोटो लिए जाएंगे। इसके बाद चालक-परिचालक पर कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर उनके वेतन से भी कटौती की जाएगी। नियमानुसार बस को इटावा से कानपुर के 60 से 70 किलोमीटर के दायरे में स्थित अनुबंधित ढाबे में रोकना होता है।
चालकों को मिलता है सुविधा शुल्क
रोडवेज बस चालकों की अनाधिकृत ढाबा संचालक खुशामद करते हैं। सूत्रों की मानें तो उन्हें मनमर्जी खाना खिलाने के साथ ही 100 और 200 रुपये भी जेब खर्च के लिए देते हैं। ऐसे में चालक अपने फायदे के लिए मनचाहे ढाबों पर बसों को रोकते हैं। अनुबंधित ढाबे के संचालक से सेटिंग कर रसीद लेकर वर्कशाप में जमा कर देते हैं और कार्रवाई से बच निकलते हैं।