मानव ही ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ कृति है। इस योनि में जीव अधिक चेतन होता है। वह अपने मूल स्वरूप को पहचान सकता है। अन्य योनियों में जीव सिर्फ भोग विलास तक ही सीमित रहता है, जिसमें उसे ईश्वर की प्राप्ति होना संभव नहीं होता है। यह बात पंडित संत कुमार पांडेय ने भक्तों के बीच कही।
मुरादगंज के बिरुहनी गांव में भागवत कथा के दौरान पंडित संत कुमार पांडेय ने कहा कि मानव जीवन को व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए, क्योंकि यह जीवन अनमोल है। इस योनि में जीव का ब्रह्मा से साक्षात्कार संभव है।
कहा कि सुदामा वैभव का नहीं ईश्वर भक्ति का याचक था, जब भक्त में ईश्वर के प्रति असीम प्रेम हो जाता है तो भक्त ईश्वर का स्मरण निश्चल भाव से करता है। भगवान अपने भक्त की आराधना जरूर सुनते है।
कथा समापन के दौरान भक्तों को प्रसाद वितरण कराया गया। इस दौरान गोपी चंद्र पांडेय, सुधीर शुक्ला, अमर सिंह परिहार, छोटे ठाकुर, ब्रजेंद्र सिंह, आलोक पांडेय आदि मौजूद रहे।