औरैया। जिले के प्रमुख मार्गों, कानपुर-इटावा हाईवे और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर वाहनों की रफ्तार पर नियंत्रण नहीं है। पिछले चार दिनों में हुए हादसों में सात लोगों की जान गई है। पुलिस की जांच में इन हादसों की मुख्य कारण गाड़ियों की बेकाबू रफ्तार सामने आई है। इसके बावजूद वाहन चालक सबक नहीं ले रहे हैं।
बीते पांच अगस्त को बिधूना कोतवाली क्षेत्र के रठगांव स्थित पेट्रोल पंप के पास एक भीषण हादसा हुआ था। इसमें तीन दोस्त हैप्पी राजावत (25), छोटे सिंह राजावत (24) और मोनू भदौरिया (23) की मौत हो गई थी। वे बिधूना से अपने गांव सराय कछवाह लौट रहे थे। इस हादसे के ठीक चार दिन बाद, आठ अगस्त की सुबह एक और दर्दनाक हादसा हुआ। यह अछल्दा थाना क्षेत्र से निकले बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर हुआ।
झांसी से बरेली उर्स मेले जा रही एक तेज रफ्तार कार डंपर में जा घुसी। हादसे में मोहम्मद जमाल (50), मोहम्मद फिरोज (45), शकीला बानो (65) और रिहाना बानो (45) की मौके पर ही मौत हो गई। ये सभी झांसी के उनाव गेट, मोहल्ला अली गोल के निवासी थे। क्रिटिकल केयर टीम की जांच रिपोर्ट में अधिक रफ्तार को हादसों का मुख्य कारण बताया गया।
यातायात पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है, पर इसका खास असर नहीं दिख रहा। यातायात विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो एक जुलाई से नौ अगस्त के बीच अधिक रफ्तार वाले 300 से अधिक वाहनों के चालान काटे जा चुके हैं।
127 किलोमीटर प्रतिघंटा में चलती मिली कार
इंटरसेप्टर बाइक आने के बाद पुलिस टीम लगातार हाईवे पर अन्य प्रमुख मार्गों पर पहुंचकर कार्रवाई कर रही है। 29 जुलाई को यह वाहन जिले की पुलिस को दिए गए थे। कानपुर-इटावा हाईवे पर चेकिंग के दौरान एक कार 80 के सापेक्ष 127 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार में चलती मिली। पुलिस टीम ने कार का चालान किया।
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आंकड़ों पर एक नजर
बिना डीएल - 524
बिना हेलमेट- 5400
तीन सवारी-1137
पार्किंग नियम का उल्लंघन- 534
मोबाइल का इस्तेमाल-131
दोषपूर्ण नंबर प्लेट- 482
गलत दिशा में वाहन चलाना-335
बीमा न होना-211
बिना सीट बेल्ट- 222
ध्वनि प्रदूषण- 215
वायु प्रदूषण-218
अन्य अपराध में चालान-699
कुल चालान-10108
नोट- ये आंकड़े जुलाई के हैं।