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कोरोना का खौफः सगे संबंधियों ने ही बनाई दूरी

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फफूंद (औरैया)। लॉकडाउन के चलते कामकाज ठप होने से बाहर से लौटे लोग कोरोना के खौफ से अपनों में ही बेगाने हो गए हैं। भाग्यनगर ब्लॉक की ग्राम पंचायत तर्रई, फूटाताल, करही, देवरपुर व फतेहपुर रामू समेत कई गांवों में बड़ी संख्या में लोग दूसरे शहरों से लौटे हैं। लेकिन अधिकांश अपनों के बीच घरों में नहीं रह पा रहे हैं। हालांकि इन सबके पास प्रशासन की ओर से दिया गया प्रमाणपत्र भी है, पर घर व गांव वाले मानने को तैयार नहीं है। हाल यह है कि कई के घर वालों ने दरवाजा तक नहीं खोला। साफ-साफ कह दिया कि क्वारंटीन होकर आओ। ऐसे में लोग गांव में ही इधर उधर शरण लेने को मजबूर हैं। सगे संबंधियों ने उन्हें स्वीकार नहीं किया तो ग्राम पंचायत प्रशासन को उनका इंतजाम खुद करना पड़ा। ग्राम पंचायत फूटाताल के प्राथमिक विद्यालय, तर्रई के प्राथमिक विद्यालय और सामुदायिक केंद्र करही, भौनकपुर, फतेहपुर रामू के सामुदायिक केंद्र, देवरपुर के आंबेडकर सामुदायिक केंद्रों पर लोग शरण लिए हैं।
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ग्राम पंचायत फूटाताल के तीन सगे भाई अनिल कुमार, निर्मल कुमार व विपिन कुमार नोएडा में एक एक्सपोर्ट फैक्ट्री में काम करते थे। यह सभी 25 मार्च के बाद लॉकडाउन के चलते किसी तरह गांव पहुंचे। यहां पहुंचने पर परिजनों ने घर के दरवाजे नहीं खोले। कहा कि पहले क्वारंटीन होकर आओ। तब से यह तीनों भाई फूटाताल प्राथमिक विद्यालय में शरण लिए हुए हैं। गांव के विनोद कुमार, अंकित, सुमित, देवेंद्र, अजय कुमार, नरेंद्र कुमार, जयप्रकाश, विमलेश कुमार दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र में एक्सपोर्ट कंपनियों में काम करते थे। वह भी इसी स्कूल में शरण लिए हैं। इनके खाने पीने का इंतजाम ग्राम प्रधान हरीशचंद्र ने किया है।
ग्राम पंचायत देवरपुर निवासी नोएडा की एक एक्सपोर्ट कंपनी में काम करने वाले पदम नारायण पुत्र ज्ञानी व हरियाणा में काम करने वाले गंगाराम 26 मार्च को गांव लौटने पर सामुदायिक केंद्र में जांच कराने के बाद भी एहतियात बरतते हुए घर के बाहर एकांत में स्थित कमरे में रह रहे हैं।
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ग्राम पंचायत तर्रई के गांव पुरवा गंगू निवासी दिल्ली में प्राइवेट कंपनी में काम करने वाले पंछीलाल व उनका पुत्र राधे, नितिन कुमार पुत्र रामदत्त, तर्रई निवासी गुरुग्राम से लौटे हरिकृष्ण पुत्र राम प्रकाश लॉकडाउन के बाद किसी तरह गांव तो पहुंच गए। लेकिन परिजनों में शंका जताते हुए जांच कराने की सलाह दी। इस समय यह लोग तर्रई के प्राथमिक विद्यालय में शरण लिए हैं। इनके भोजन आदि की जिम्मेदारी प्रधान के पति लोकेश गौतम उठा रहे हैं।
फफूंद के गांव मुंशीपुर व दीदारपुर में महाराष्ट्र व गुजरात में फेरी लगाकर सामान बेचने वाले 30 से अधिक लोग 31 मार्च तक बाइक व अन्य साधनों से गांव पहुंचे। इन लोगों ने अभी तक न अपनी जांच कराई और नहीं ग्राम पंचायत में स्थित क्वारंटीन सेंटर में पहुंचे। इससे आसपास के गांव के लोगों में भय बना हुआ है। तर्रई पंचायत के ग्राम प्रधानपति लोकेश गौतम ने बताया कि सरकार के निर्देशानुसार उन्होंने अन्य प्रांतों से लौटे गांव के लोगों के लिए प्राथमिक विद्यालय तर्रई में रुकने व भोजन की व्यवस्था की है। बाहरी लोग यहां ठहर सकते हैं और अगर जांच न कराई हो तो जांच करा लें।
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