मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के विश्वासपात्र गुड्डू वर्मा की सियासी गाड़ी ट्रैक पर आ गई है। राजनीति से जुड़े खानदान से ताल्लुक रखने वाले गुड्ड़ू वर्मा ने रूस से एमबीबीएस की पढ़ाई की है। कई बार वह अखिलेश की गाड़ी चलाकर क्षेत्र में ले गए हैं। अखिलेश की दोस्ती से सियासी ट्रैक पर पहुंची उनकी गाड़ी पर ही परिवार की विरासत भी टिकी है।
ूअखिलेश यादव और गुड्डू वर्मा की दोस्ती जगजाहिर रही है। इसी दोस्ती के चलते अखिलेश ने बिधूना से मुलायम सिंह यादव के साढ़ू प्रमोद कुमार गुप्ता एलएस का टिकट काटकर गुड्डू को दे दिया। गुड्डू के पिता धनीराम वर्मा भी मुलायम सिंह यादव के खास मान जाते हैं। वह भी बिधूना से छह बार और एक दफा औरैया से विधायक रहे हैं। मुलायम परिवार से नजदीकियों के चलते ही गुड्डू वर्मा की अखिलेश से दोस्ती हुई थी। हालांकि बाद में गुड्डू एमबीबीएस की पढ़ाई करने रूस चले गए।
जब स्वदेश लौटे, तब तक अखिलेश कन्नौज के सांसद के रूप में राजनीतिक पारी शुरू कर चुके थे। 2009 के लोकसभा चुनाव से पहले आपसी संबंधों में सियासी दरार भी आई। धनीराम वर्मा व भाई महेश वर्मा ने सपा छोड़कर बसपा का दामन थाम लिया। बसपा ने डा. महेश वर्मा को कन्नौज लोकसभा से उम्मीदवार बनाया। डा. महेश वर्मा ने बसपा से अखिलेश यादव के खिलाफ चुनाव लड़ा। ऐसे में अखिलेश के साथ रहने वाले गुड्डू साइलेंट मोड में चले गए।
अखिलेश यादव कन्नौज से जीतकर फिर सांसद बने। 2009 में ही धनीराम वर्मा ने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया। बसपा के टिकट से महेश विधायक बने। बाद में धनीराम वर्मा फिर सपा में शामिल हुए। गुड्ड़ू ने भी अखिलेश से दोबारा नजदीकियां बढ़ाई तो बर्फ पिघली और गुड्डू को पुरानी दोस्ती का तोहफा बिधूना से टिकट के रूप में मिल गया।