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छात्रों के भविष्य की चिंता का हल भी ढूढ़ लेगी भारत सरकार

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फोटो-05एयूआरपी-31- रेलवे स्टेशन फफूंद पर हिमांशु का स्वागत करते स्थानीय लोग एवं परिजन। संवाद - फोटो : AURAIYA
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दिबियापुर। यूक्रेन में फंसे दिबियापुर के सराफ मोहन पोरवाल के बेटे हिमांशु पोरवाल शनिवार की शाम ट्रेन से घर आ गए। परिजनों एवं स्थानीय लोगों ने फूल मालाओं से उनका स्वागत किया।
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सकुशल घर वापसी पर हिमांशु ने बताया कि यूक्रेन से एमबीबीएस कर रहे छात्र-छात्राओं को अब चिंता यह है कि उनका भविष्य क्या होगा। हालांकि उन्होंने विश्वास जताया कि भारत सरकार इस समस्या का भी हल जल्द ही खोज लेगी।
बताया कि वह एक मार्च की सुबह रोमानिया पहुंच गए थे। तीन दिन तक शिविर में जरूर रुकना पड़ा, लेकिन किसी प्रकार की समस्या नहीं हुई। शनिवार की सुबह दस बजे रोमानिया से दिल्ली आ गए थे। शाम को गोमती एक्सप्रेस से दिबियापुर आ गए। स्थानीय लोगों के साथ नगर पंचायत अध्यक्ष अरविंद पोरवाल ने भी हिमांशु का स्वागत किया। मां शशि, बहन प्रिया हिमांशु से मिलकर भावुक हो गए।
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यूक्रेन के डेनप्रो शहर से एमबीबीएस कर रहे औरैया के असजना गांव निवासी शिव प्रताप सिंह चौहान दो दिन से दहशत के बीच अन्य छात्रों के साथ रोमानिया के शेल्टर होम में रुके थे। शनिवार को फ्लाइट से दिल्ली आ गए हैं। युद्ध के बीच सकुशल लौटने की खुशी शिव ने फ्लाइट के अंदर की फोटो लेकर जाहिर की। इधर छात्र के घर लौटने पर परिवार के लोगों में खुशी है।
रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट से दिल्ली आने वाली फ्लाइट में बैठकर सकुशल आने की फोटो परिजनों व दोस्तों को शेयर करते हुए शिव प्रताप ने खुशी जाहिर की है। बेटे शिव को सुरक्षित देख पूर्व सैनिक पिता ब्रजपाल और मां काफी खुश हैं। पिता ने बताया कि फोन पर हुई बात में शिव प्रताप शनिवार देर रात तक औरैया पहुंचने की जानकारी दी है।
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