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Auraiya News: फर्जी फर्म बनाकर 2.29 करोड़ की जीएसटी चोरी में चार गिरफ्तार

Tue, 24 Feb 2026 11:35 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
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फोटो-35-पुलिस गिरफ्त में खड़े जीएसटी चोरी के आरोपी। स्रोत: पुलिस - फोटो : बीएसए कार्यालय पर ज्ञापन देने पहुंचे प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के पदा​धिकारी। स्रोत: स्वयं
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औरैया। फर्जी फर्में बनाकर 2.29 करोड़ की कर चोरी करने वाले चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपियों में एक झारखंड का है, जबकि एक आरोपी शहर का नामचीन व्यापारी है।
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पुलिस ने इनके पास से फर्जी दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं। आरोपी जरूरतमंद को 10 से 15 हजार रुपये का लालच देकर उनके दस्तावेज लेते थे। इसके बाद उनके नाम से फर्जीवाड़ा करते थे। कोर्ट में पेश करने के बाद आरोपियों को जेल भेज दिया गया। वहीं, पुलिस की जांच में अभी 35 फर्जी दुकानें पता चली हैं।
सदर कोतवाली में मंगलवार को एसपी अभिषेक भारती ने बताया कि 30 जुलाई 2025 को झारखंड के धनबाद निवासी बापी केवरा पर राज्य कर अधिकारी इटावा वीरी सिंह ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें करीब 2.29 करोड़ रुपये की कर चोरी का आरोप लगाया था। एसपी ने बताया कि इस मामले की जांच के लिए एसआईटी में थाना प्रभारी निरीक्षक राजीव कुमार, अपराध शाखा के प्रभारी निरीक्षक भूपेंद्र चौहान और उपनिरीक्षक हेमंत चौधरी आदि को शामिल किया गया था।
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मंगलवार को टीम ने प्रांत झारखंड जिला धनबाद थाना चिरकुंडा के गांव मिराहा निवासी श्यामसुंदर, इसी थाने के गांव मैथन निवासी अशोक कुमार पासवान को गिरफ्तार किया। इनके अलावा औरैया शहर स्थित रोडवेज बस स्टैंड के सामने मंगला पैलेस निवासी व्यापारी महावीर शरण उर्फ पहाड़िया और शहर के मोहल्ला गुमटी मोहाल निवासी विमल कुमार को जीएसटी चोरी के आरोप में मधुपुर गांव के पास से गिरफ्तार कर लिया। ये लोग औरैया में फर्जी व्यापार चला रहे थे।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वह जरूरतमंद लोगों को 10 से 15 हजार रुपये का लालच देकर उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक पासबुक जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज हासिल कर लेते थे। इन दस्तावेजों से फर्जी फर्में तैयार कर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) क्लेम कर सरकार को करोड़ों की चपत लगाते थे। अब तक की जांच में पाया गया है कि आरोपियों ने शहर में करीब 35 दुकानें किराये पर ली थीं।
एसपी ने बताया कि अब तक की जांच में करीब 2.29 करोड़ रुपये की कर चोरी का मामला सामने आया है। पूछताछ के बाद आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया। वहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
महावीर पहाड़िया है मास्टरमाइंड
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किया गया श्याम सुंदर पासवान भोले-भाले लोगों को बरगलाकर दस्तावेज जुटाने का मुख्य काम करता था। वहीं अशोक कुमार पासवान कंप्यूटर पर दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर फर्जी कंपनियां तैयार करने का एक्सपर्ट है। महावीर शरण उर्फ पहाड़िया बोगस फर्मों के माध्यम से आईटीसी पास ऑन करने और राजस्व चोरी का मास्टरमाइंड है। विमल कुमार अपने नाम पर फर्जी फर्म बनवाकर कमीशन और आर्थिक लाभ लेता था।
आरोपियों के पास से बरामद सामान
पुलिस ने बताया कि आरोपियों के पास से दो लैपटॉप, आठ एंड्रॉयड व नौ कीपैड मोबाइल फोन, आठ पासबुक, सात डेबिट कार्ड, 12 आधार कार्ड, 11 रजिस्टर बरामद किए गए हैं। इसके अलावा आरोपियों के पास से 20 सिम कार्ड और छह हजार रुपये नकद बरामद किए गए।
दस्तावेज देने वाले आठ लोगों तक पहुंची पुलिस



अब तक की जांच में पुलिस ऐसे आठ लोगों तक पहुंची हैं, जिनके दस्तावेजों का प्रयोग बोगस फर्में बनाने के लिए किया गया था। इसमें अधिकांश झारखंड के निवासी हैं। पुलिस के अनुसार ऐसे लोगों की संख्या करीब 30 से 35 होने की आशंका है। इसके लिए पुलिस गहनता से जांच कर रही है।

बोगस फर्मों के लिए लोगों से जुटाते थे दस्तावेज, बाद में बंद कर देते थे फर्म

औरैया। जीएसटी चोरी करने के लिए आरोपी बोगस फर्में बनाते थे। इन फर्मों के लिए दस्तावेज लोगों को लालच देकर जुटाए जाते थे। बाद में फर्म को बंद कर देते थे। आरोपी पुलिस से बचने के लिए कीपैड फोन का इस्तेमाल करते थे।
इस फोन का उपयोग ओटीपी के लिए किया जाता है। जीएसटी चोरी करने के बाद आरोपी फर्म बंद करने के साथ मोबाइल नंबर भी बंद कर देते थे। यही नहीं एक फर्म में काम होने के बाद दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर पता बदलकर दूसरी फर्म तैयार करते थे।
सदर कोतवाली में 30 जुलाई 2025 को प्राथमिकी दर्ज होने पर पुलिस ने जांच शुरू की तो पुलिस के पास केवल उनके नाम थे, जिनके नाम पर फर्म तैयार की जाती थीं। काफी प्रयास के बाद भी पुलिस के हाथ सुराग नहीं लगा। दस्तावेजों में दिए गए पतों पर जब भी पुलिस पहुंची तो वहां इस नाम का कोई नहीं मिला।
पुलिस के अनुसार आरोपी लालच देकर लोगों के दस्तावेज लेने के बाद फर्जी किरायानामा और बिजली बिल तैयार कर जीएसटी पोर्टल पर फर्जी फर्में पंजीकृत कराते थे। इन बोगस फर्मों के जरिये बिना किसी वास्तविक माल की खरीद-बिक्री के फर्जी बिल जारी किए जाते थे।
मामले में काफी प्रयास के बाद भी पुलिस के हाथ कुछ नहीं लगा तो उन्होंने वोटर लिस्ट का इस्तेमाल कर मोहल्ले के सभासदों की मदद ली। किसी तरह पुलिस किराये की दुकानों पर पहुंची तो दुकान मालिक ने बताया आरोपी दुकान किराये पर लेकर फोटो खिंचवाने के बाद दोबारा वहां नहीं आते थे। इसके बाद किराया भी नहीं दिया जाता था।
वहीं, दुकान मालिकों को दिया नंबर भी बंद कर लेते थे। शहर में करीब 35 दुकानें किराये पर ली गईं थीं। पुलिस जांच में सामने आया कि दुकान का किरायानामा एक साल के लिए किया जाता था, इससे दुकान मालिक को भी कोई शक नहीं होता था।

जांच के दौरान पहले पुलिस इन दुकान मालिकों तक पहुंची। इसके बाद उन्हीं के जरिये पुलिस श्याम सुंदर तक पहुंच गई और पूरे घटनाक्रम को खोलकर रख दिया।

महावीर शरण का विवादों से रहा नाता
शहर स्थित मंडी समिति में साल 2017 में करीब 90 आढ़तियों के साथ साढ़े छह करोड़ की धोखाधड़ी का मामला सामने आया था। सूत्रों के अनुसार उस वक्त महावीर पहाड़िया का नाम भले कागजों में न आया हो, लेकिन उसका हस्तक्षेप रहा था। इसके अलावा अन्य व्यापारियों से भी उनका लेनदेन को लेकर विवाद रहा।
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