औरैया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने खराब सामान और मानसिक उत्पीड़न के आरोप में ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म फ्लिपकार्ट को सामान बदलने आदेश दिए हैं।
इसके अलावा ग्राहक का मानसिक उत्पीड़न होने पर जुर्माना भरने का भी आदेश दिया है। यह आदेश 28 जनवरी को हुआ है। सदर कोतवाली के गांव शहब्दा निवासी शुभम चतुर्वेदी ने फ्लिपकार्ट के माध्यम से एक इंडक्शन चूल्हा खरीदा था। कुछ समय बाद वारंटी के दौरान ही उपकरण ने काम करना बंद कर दिया।
शुभम ने कंपनी के हेल्प डेस्क और सर्विस सेंटर पर कई बार गुहार लगाई, लेकिन घंटों फोन पर समय बर्बाद करने और बार-बार शिकायत के बावजूद कंपनी ने न तो सामान ठीक किया और न ही उसे बदला। इस पर शुभम ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में शिकायत दर्ज कराई। यह परिवाद 18 मार्च 2025 को दायर किया गया था।
परिवादी की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता संजीव पांडेय ने आयोग के समक्ष कंपनियों की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने दलील दी कि बड़ी कंपनियां सामान बेचते समय लुहावने ऑफर देती हैं, लेकिन सामान में खराबी आते ही ग्राहक को छोड़ दिया जाता है। उन्होंने साक्ष्यों के साथ यह साबित किया कि यह सीधे तौर पर ग्राहक का आर्थिक और मानसिक शोषण है।
अधिवक्ता के तर्कों से सहमत होकर आयोग के अध्यक्ष जगन्नाथ मिश्र व सदस्यों ने विपक्षी कंपनियों के बचाव को पूरी तरह खारिज कर दिया। आयोग ने आदेश दिया कि कंपनी 45 दिन के अंदर परिवादी को नया इंडक्शन उपलब्ध कराए। सामान नहीं बदला जाता, तो पूरी धनराशि 1,304 रुपये लौटानी होगी। मानसिक पीड़ा और वाद व्यय के रूप में 1,500 रुपये अतिरिक्त जुर्माना देना होगा।