औरैया। विशेष न्यायाधीश महेश कुमार की अदालत ने डकैती के एक गंभीर मामले में सुनवाई पूरी कर ली है। अदालत ने सभी पांच आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है। सुनवाई के दौरान वादी अपने बयानों से मुकर गई थी, जिससे अभियोजन पक्ष के साक्ष्य अपर्याप्त माने गए।
यह मामला थाना बेला क्षेत्र के गांव भंडरिया से जुड़ा है। वादी शिरोमणि ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया था कि 10 जुलाई 2008 को धनीराम, ज्ञान सिंह, हिमंचल, सरोजनी देवी और मनु देवी घर में घुस आए थे। उसे लाठी-डंडों व धारदार हथियारों से मारपीट कीकर गले से चांदी की जंजीर लूट ली थी। पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज न किए जाने पर अदालत के आदेश के बाद मामला दर्ज हुआ था।
विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष ने वादी शिरोमणि, उनकी सास मनोज और गांव की मीरा देवी को पेश किया। हालांकि, मुख्य गवाही के समय सभी गवाह अपने बयानों से मुकर गए। इन्हें पक्षद्रोही घोषित किया गया। परिवादिनी और अन्य गवाहों ने अदालत में स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि घटना के समय वे आरोपियों को पहचान नहीं पाई थीं। अदालत में मौजूद आरोपी धनीराम, ज्ञान सिंह, हिमंचल, सरोजनी देवी और मनु देवी इस घटना में शामिल नहीं थे। गवाहों के समर्थन न करने से अभियोजन पक्ष आरोप साबित नहीं कर सका।
अभियोजन पक्ष संदेह से परे आरोप साबित करने में विफल रहा। इस आधार पर न्यायाधीश ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने साक्ष्यों को अपर्याप्त मानते हुए यह निर्णय सुनाया। यह फैसला मामले की गंभीरता को देखते हुए महत्वपूर्ण है।
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जन्माष्टमी में युवक की हत्या के आरोपी को जमानत
औरैया। अजीतमल थाना क्षेत्र के हालेपुर गांव में कृष्ण जन्माष्टमी की रात टहलने निकले युवक समित नारायण की हत्या के मामले में सत्र न्यायालय ने मुख्य आरोपी रितिक कुमार का जमानत प्रार्थना पत्र स्वीकार कर लिया है।
वादी मुकदमा अशोक कुमार ने अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था कि जन्माष्टमी की रात पुत्र समित नारायण (25) खेत की तरफ गया था, अगले दिन सुबह वह मूली के खेत में मृत मिला। उसके सिर और शरीर पर धारदार हथियार से गंभीर वार किए गए थे। विवेचना के दौरान पुलिस ने आरोपी रितिक कुमार पकड़कर हत्या करने का दावा किया था। उसकी निशानदेही पर मृतक का मोबाइल फोन व लोहा बांका बरामद किया था। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने दलील दी कि आरोपी पूरी तरह निर्दोष है और उसे महज संदेह व रंजिश के आधार पर फंसाया गया है। घटना का कोई भी गवाह नहीं है। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश मयंक चौहान ने आरोपी का कोई पिछला आपराधिक इतिहास न होने और मामले के तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए एक लाख रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र व समान धनराशि के दो जमानतों पर उसे रिहा करने का आदेश दिया है।(संवाद)