औरैया। फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के सहारे शिक्षक की नौकरी पाने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बीएसए संजीव कुमार ने छह साल बाद ऐसे 60 शिक्षकों को अंतिम चेतावनी नोटिस जारी किया है। इन शिक्षकों को दिव्यांगता की जांच कराने का अल्टीमेटम दिया गया है।
यह मामला औरैया जनपद में साल 2017 में सामने आया था। उस समय जिला स्तर पर जांच हुई और एक एसआईटी भी गठित की गई थी। शासन स्तर से भी इस मामले का संज्ञान लिया गया था। जिला, मंडल और शासन स्तर पर तीन चरणों में जांच शुरू की गई। साल 2020 से विभाग लगातार नोटिस जारी कर रहा है। हालांकि, अब तक केवल 12 शिक्षकों ने ही अपनी जांच कराई है। शेष 60 शिक्षक अभी भी जांच से बच रहे हैं।
शासन ने जांच को पारदर्शी बनाने के लिए अफसरों और मेडिकल टीम का रोडमैप बनाया था। शिक्षकों को केजीएमयू लखनऊ में अपनी दिव्यांगता की जांच करानी थी। बीएसए संजीव कुमार ने 60 शिक्षकों को 15 दिन के अंदर केजीएमयू पहुंचने का अंतिम निर्देश दिया है। निर्धारित समय में जांच न कराने पर उनके खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी। बेसिक शिक्षा विभाग में इस नोटिस के बाद से खलबली मची है और नवंबर में बड़ी कार्रवाई की उम्मीद है।
जांच कराने वाले दो शिक्षकों का खुल गया था राज
सीएमओ कार्यालय से दिव्यांगता का प्रमाण पत्र बनवाने वाले दो शिक्षकों का राज पहले ही जांच में खुल चुका है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार नौकरी में दिव्यांगता का लाभ लेने के लिए 40 प्रतिशत के प्रमाण पत्र की जरूरत होती है, लेकिन पकड़े गए दो शिक्षकों में यह प्रतिशत महज दो प्रतिशत ही पाया गया था। बेरा मशीन से हुई इस जांच में शिक्षकों की करतूत सामने आ गई थी। हालांकि अब दोनों शिक्षकों का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। जहां से उन्हें राहत मिलती नजर नहीं आ रही है।
इस जांच में तीन जगह से चल रहा पत्राचार
शासन के निर्देश पर फर्जी प्रमाण पत्र के सहारे नियुक्त होने वाले शिक्षकों की जांच को वृहद किया गया है। इसमें लखनऊ के केजीएमयू में जांच के बाद डायट प्राचार्य को रिपोर्ट आ रही है। जहां से इस रिपोर्ट को बीएसए कार्यालय भेजा जा रहा है। विभागीय जानकार बताते हैं कि साल 2017 से पहले हुई भर्ती में डायट की अहम भूमिका रही थी। ऐसे में डायट को भी इस जांच का हिस्सा बनाया गया है।
बर्खास्तगी, रिकवरी और रिपोर्ट की तैयारी
विभागीय अफसरों के लिए छह साल से चली आ रही इस जांच की प्रक्रिया ने मंडल और शासन की जवाबदेही के बीच परेशान कर दिया है। नोटिस के बाद नोटिस जारी होने के बाद भी जांच पूरी तरह से मुकाम तक नहीं पहुंच सकी है। विभागीय सूत्रों की मानें तो अधिकारी इस मामले में अब बर्खास्तगी, रिकवरी और मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी बना रहे हैं।
वर्जन
फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी पाने वाले शिक्षकों की जांच लंबी होती जा रही है। चिह्नित 60 शिक्षक केजीएमयू में जांच कराने नहीं जा रहे हैं। उन्हें अंतिम चेतावनी नोटिस जारी किया गया है। अब भी जांच न कराने पर शिक्षकों पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।-संजीव कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी