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Auraiya News: जिलाधिकारी के पूर्व ओएसडी की पत्नी का फर्जी पट्टा निरस्त, जमीन ग्राम पंचायत में होगी मर्ज

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26 जुलाई 2024 के अंक में प्रकाशित खबर। - फोटो : 26 जुलाई 2024 के अंक में प्रकाशित खबर।
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औरैया। जिला मजिस्ट्रेट की अदालत ने डीएम के पूर्व ओएसडी व वर्तमान में बिधूना एसडीएम स्टेनो राजकुमार की पत्नी के नाम पर फर्जी तरीके से आवंटित पट्टे को निरस्त कर दिया है।
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कोर्ट ने अपने आदेश में जमीन को ग्राम पंचायत में दर्ज कराने के लिए सदर तहसीलदार को निर्देश दिया है। साथ ही एडीएम को राजकुमार पर विभागीय कार्रवाई के लिए पत्रावली तैयार करने के कहा है। सेहुद की इस जमीन की कीमत तकरीबन दो करोड़ रुपये बताई जा रही है।

अमर उजाला ने जुलाई माह में ‘जमीन के फर्जीवाड़े’ की सीरीज चलाकर जनपद में अवैध तरीके से कब्जाई गई कई जमीनों के राज खोले थे। इसी कड़ी में तत्कालीन डीएम के ओएसडी राजकुमार का भी मामला सामने आया था।
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साल 2000 में सदर तहसील में बतौर एसडीएम स्टेनो रहने के दौरान राजकुमार ने अपनी पत्नी गीता के नाम फर्जी प्रपत्रों के सहारे सेहुद गांव में एनटीपीसी से सटी बेशकीमती जमीन का पट्टा करा लिया था। जब मामला सुर्खियों में आया, तब राजकुमार डीएम के ओएसडी की कुर्सी पर तैनात थे।

एक शिकायतकर्ता की शिकायत पर अमर उजाला ने प्रकरण को 26 जुलाई 2024 के अंक में प्रकाशित किया था। इसके बाद मामले का संज्ञान लेकर डीएम ने जांच एडीएम को सौंपी थी।

वहीं, राजकुमार को बिधूना एसडीएम का स्टेनो बना दिया था। उधर, जांच रिपोर्ट में सरकारी कर्मचारी रहते हुए पत्नी को फर्जी प्रपत्र के सहारे लाभ दिलाने की बात सामने आई थी। सुमोटो के तहत तत्कालीन एसडीएम से यह लाभ पा लिया गया था।

खास बात यह थी कि 160 वर्ग फीट जमीन को 29 अगस्त 2011 में बेच भी दिया गया था। इस जमीन पर एक करोड़ से ज्यादा कीमत की बिल्डिंग खड़ी कर दी गई थी।

जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला मजिस्ट्रेट की अदालत में वाद दायर किया गया। 15 जनवरी को जिला मजिस्ट्रेट डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने फैसला सुनाते हुए आदेश जारी किया।

जारी आदेश में फर्जी तरीके से आवंटित पट्टे को निरस्त करते हुए उसे ग्राम पंचायत में दर्ज करने के निर्देश तहसीलदार को दिया गया है। बतौर सरकारी कर्मचारी राजकुमार को पत्नी के नाम बेशकीमती जमीन पर अपात्र होने के बावजूद पट्टा कराने का दोषी पाया। राजकुमार पर विभागीय कार्रवाई के लिए एडीएम को निर्देश दिए गए हैं।
सात अन्य अपात्रों के भी पट्टे किए निरस्त
औरैया। डीएम के पूर्व ओएसडी राजकुमार के अलावा भी कई अपात्रों ने फर्जी तरीके से पट्टा आवंटन का लाभ लिया था।

ऐसे सात मामलों में भी जिला मजिस्ट्रेट कोर्ट ने हथियाए गए पट्टे की जमीन को निरस्त कर दोबारा से ग्रामसभा में दर्ज कराने का आदेश दिया है। आवंटन के दौरान किसी के परिवार में कोई सरकारी कर्मचारी था तो कोई दूसरी जगह पर रह रहा था। संबंधित गांव में पट्टा पाने के लिए फर्जी तरीके से उस गांव के दस्तावेज बना लिए थे। मुख्य रोड से सटी इन बेशकीमती जमीनों पर हक जमा लिया गया था।

डीएम ने अलग-अलग वादों में जारी आदेश के क्रम में ब्रह्मनगर मोहल्ला निवासी आशीष दुबे, अरविंद कुमार पुत्र बदन सिंह, सदर एसडीएम के अर्दली राकेश कुमार, परिवहन विभाग में कार्यरत रहे प्रमोद कुमार, परिवहन विभाग में तत्कालीन कार्यरत रहे बेचे लाल के पुत्र अरविंद व राजेश पुत्र ज्ञान स्वरूप के पट्टे निरस्त किए गएहैं।

इन सभी ने मानकों के तहत अपात्र होने के बावजूद पढ़ीन में 0.012-0.012 हेक्टेयर पट्टा करा लिए थे। वहीं, वैसुंधरा में सुमन देवी के नाम 0.03 एकड़ पट्टा करा लिया गया था। गेल-पाता से सटे वैसुंधरा की इस जमीन की कीमत करोड़ों में है।

वहीं, पढ़ीन में औरैया फफूंद मार्ग के किनारे भी जमीन बेशकीमती रही। जारी आदेश में सुमन देवी के पति रविंद्र सिंह कलक्ट्रेट में लिपिक पाए गए। सभी के पट्टे निरस्त किए गए हैं।
जुगाड़ के सिंडीकेट पर हथौड़ा

औरैया। गरीबों व बेघर लोगों को आवासीय पट्टे दिए जाते हैं। इसके लिए उन्हें अपनी ग्राम पंचायत में पात्रता के अनुसार जमीन दी जाती है। सरकारी तंत्र में सेंधमारी कर जुगाड़ का सिंडीकेट इस कदर चला कि चुनिंदा लोगों ने गरीबों का हक मार लिया। बेशकीमती जमीनें हथिया लीं। इस कार्य में सरकारी मुलाजिम भी शामिल रहे। जानकारों की मानें तो इन जमीनों व उन पर बने मकानों की कीमत 20 करोड़ के करीब है। वसुंधरा, सेहुद व पढ़ीन के चुनिंदा इलाके बेशकीमती हैं। हालांकि, इस सिंडीकेट पर प्रशासन का हथौड़ा चल गया है।



सेहुद में फर्जी तरीके से सरकारी कर्मचारी राजकुमार को पत्नी के नाम पट्टा आवंटन कराने का दोषी पाया गया है। मामले में आवंटित जमीन के पट्टे को निरस्त कर ग्राम पंचायत में सम्मिलित करने के लिए सदर तहसीलदार को आदेश दिए गए हैं। साथ ही संबंधित पर विभागीय कार्रवाई के लिए एडीएम को निर्देश दिए गए हैं। साथ ही अन्य सात के भी पट्टे निरस्त किए गए हैं।
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-डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी, जिला मजिस्ट्रेट
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