न खुद का घर है और न पुरखों की जमीन, बिटिया के हाथ पीले करने को दूसरे के खेत पर लागत भी लगाई, परिवार के सभी सदस्यों ने रात-दिन खूब मेहनत की। लेकिन बेमौसम हुई बारिश ने फसल बर्बाद तो की ही, लागत डुबोने के साथ ही अरमानों को बहा कर रख दिया। यह पीड़ा है सदर ब्लाक क्षेत्र के ग्राम मधूपुर के भूमिहीन किसान रामकिशोर की।
तीन पुत्र और तीन पुत्रियों सहित आठ सदस्यीय परिवार का मुखिया रामकिशोर दूसरे के खेतों में पसीना बहाकर पेट पालता है। उनके इस कार्य में परिवार के अन्य सदस्य भी हाथ बंटाते हैं। फसल कटाई के बाद सयानी हो रही बिटिया सुधा के हाथ पीले करने को रामकिशोर ने इस बार गांव के रामस्वरूप, बृजेंद्र सिंह व पड़ोसी गांव के दुबे महाराज की कुल 14 बीघा खेती तिहाई बटाई रखी थी।
खेत मालिकों की मरजी से गरीब रामकिशोर ने पूरी जमीन पर गेहूं की फसल बोई थी। लहलहाती फसल देख रामकिशोर ने सुधा के हाथ पीले करने को 11 जून की तारीख भी तय कर दी थी। लेकिन मार्च/अप्रैल माह की बारिश 75 फीसदी फसल बर्बाद करने के साथ ही रामकिशोर के परिवार पर विपदा साबित हुई है।
बटाई की भूमि पर 45 हजार रुपये लगाने के बाद बिगड़ी फसल से उसे बमुश्किल 12 क्विंटल अनाज मिलने की आस है। गुरुवार को वह और उसका परिवार खेतों पर काम करते हुए मिला। उसका यही कहना था कि वह अपनी बिटिया के हाथ कैसे पीले कर पाएगा। उसे तो मुआवजा मिलना भी मुश्किल है।