औरैया। परिषदीय स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात को दुरुस्त करने की नई स्कूल विलय नीति बेसिक शिक्षा विभाग भले ही कारगर मान रहा हो लेकिन हकीकत कुछ और है। जिले में स्कूल विलय नीति से छात्र जरूर स्कूल से दूर हुए हैं। यही वजह है कि यहां पर मर्ज स्कूलों के छात्र नए पते पर कम पहुंच रहे हैं। हालांकि मर्ज स्कूलों के बच्चों को चौखट तक लाने के लिए शिक्षक अभिभावकों से संवाद कर रहे हैं। अभिभावक भी अपने बच्चों को घर से स्कूल की दूरी ज्यादा बता रहे हैं। शिक्षक अभिभावकों को समझाते हुए मर्ज छात्रों की संख्या सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहे हैं। फिर भी शत-प्रतिशत छात्र नए पते पर नहीं पहुंच रहे हैं।
जिले में 1265 परिषदीय स्कूल हैं। इसमें से 91 स्कूलों को नजदीकी स्कूलों में मर्ज कर दिया गया है। खाली हुए भवनों में जहां बाल वाटिका के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसी बीच मौजूदा बच्चों को नए पते के स्कूल भेजने की मशक्कत चल रही है। अमर उजाला की टीम ने सोमवार को स्कूलों की पड़ताल की तो मर्ज स्कूलों के बच्चे नए पते पर कम पहुंचने की बात सामने आई। हालांकि इसके पीछे घर व नए स्कूल के बीच दूरी अधिक होना बताया गया। बताया जा रहा है कि स्कूलों में जो बच्चे अनुपस्थित रह रहे हैं। उनके अभिभावकों से शिक्षक संवाद कर रहे हैं और उन्हें स्कूल भेजने की अपील कर रहे हैं। फिर भी अभिभावक हैं कि अपने पाल्यों की सुरक्षा के लिहाज से वो उन्हें भेजने से कतरा रहे हैं।
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केस-01)
छह बच्चे नहीं आ रहे स्कूल
अजीतमल कस्बा स्थित प्राथमिक विद्यालय अजीतमल को कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय सूर्यनगर में मर्ज किया गया था। मर्ज करने के दौरान 24 छात्रों को नए स्कूल कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय सूर्यनगर पहुंचना था लेकिन यहां पर अभी तक इनमें से 20 बच्चे ही स्कूल पहुंचे हैं। इनमें से 18 बच्चे ही नियमित स्कूल आ रहे हैं। मर्ज के बाद छह बच्चों की कमी देखी जा रही है। कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय सूर्यनगर अजीतमल के प्रधानाध्यापक अरुण दीक्षित ने बताया कि प्राथमिक विद्यालय अजीतमल उनके स्कूल में मर्ज हुआ था। तब उसकी छात्र संख्या 24 थी। इसमें 20 बच्चे उनके विद्यालय पहुंचे थे। इसमें अब सिर्फ 18 बच्चे ही स्कूल आ रहे हैं।
सीन-02)
12 में से तीन ही बच्चे आ रह हैं
सहार ब्लॉक के पौंथी परिषदीय स्कूल का शिवगंज में विलय किया गया था। पौथी परिषदीय स्कूल में विलय के समय छात्र संख्या 12 थी लेकिन विलय के बाद बच्चों के नए स्कूल का पता शिवगंज हो गया है। यहां पर महज तीन बच्चे ही आ रहे हैं। ऐसे में नौ बच्चों के अभिभावकों से शिक्षकों को संवाद करने की जरूरत है।
सीन-03)
द्वारिकापुर के बच्चे पढ़ने जा रहे काजीपुर
फफूंद क्षेत्र के सिंगलामऊ प्राथमिक स्कूल के बच्चों को नजदीकी काजीपुर गांव के स्कूल से संबंध किए गए हैं। यहां के बच्चों को स्कूल पहुंचने में ज्यादा परेशानी नहीं है। इससे यहां बच्चों की उपस्थिति ठीकठाक रहती है। द्वारिकापुर प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक राघवेंद्र समेत तीन शिक्षक तैनात थे। यहां पर 30 बच्चे पंजीकृत थे। बच्चों की संख्या पूरी न होने के कारण इस विद्यालय को गांव से कुछ दूरी पर स्थित काजीपुर प्राथमिक विद्यालय में विलय कर दिया गया। प्रधानाध्यापक राघवेंद्र सिंह ने बताया कि विद्यालय नजदीक होने से द्वारकापुर के बच्चे समय पर विद्यालय पहुंच रहे हैं। पंजीकृत 30 बच्चों में कभी 24 तो कभी 25 बच्चे पढ़ने आ रहे हैं।
वर्जन
अभिभावकों से हो रहा संवाद
मर्ज होने के बाद नए पते पर बच्चों को स्कूल पहुंचाने के लिए अभिभावकों से शिक्षक संवाद कर रहे हैं। धीरे-धीरे बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है।
संजीव कुमार, बीएसए