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सूखा पड़ा फफूंद व कोठीपुर रजबहा

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सूखा पड़ा जैतपुर माइनर। संवाद - फोटो : AURAIYA
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फफूंद। कोठीपुर और फफूंद रजबहा में घसारा नहर से पानी नहीं छोड़ा जा रहा है। इस वजह से दोनों रजबहों से जुड़े नौ माइनर भी सूखे हैं। धान नर्सरी की बोआई व अन्य फसलों की सिंचाई के लिए किसान परेशान हैं। किसानों का कहना है कि रजबहों और माइनरों में पानी न आने से करीब छह हजार हेक्टेयर भूमि प्रभावित हो रही है। कई बार पानी छोड़े जाने की मांग उठी, पर अधिकारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया।
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सिंचाई विभाग प्रति वर्ष सिल्ट सफाई और रजबहा, माइनरों की साफ सफाई को लेकर लाखों रुपये खर्च कर रहा है। इसके बावजूद समय से पानी न मिलने से किसान परेशान हैं। घसारा नहर मुख्य शाखा से निकले 30 किलोमीटर लंबे फफूंद रजबहा से मिलने वाले पानी से क्षेत्र की छह हजार हेक्टेयर भूमि की फसलों की सिंचाई की जाती है।
फफूंद रजबहा से कोठीपुर रजबहा व नौ माइनर केशमपुर, नगरिया, सेनपुर, फफूंद दायां, फफूंद बायां, शाह आलमपुर, सिंदुरिया आलमपुर, दौलतपुर, महतेपुर को पानी दिया जाता है। इस वक्त फफूंद रजबहा सूखा होने से कोठीपुर रजबहा व माइनर भी सूखी हुई हैं। किसान परेशान है कि धान की नर्सरी कैसे लगाएं। समय से पानी न मिलने और नर्सरी का समय निकलता देख किसान परेशान हैं।
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अधिशासी अभियंता सिंचाई शिवराज सिंह ने कहा कि रामगंगा कमांड से पांच हजार क्यूसेक पानी की मांग की गई है। इन दिनों ऊपर से ही पानी कम आ रहा है। इस वजह से रजबहा और माइनरों तक पानी कम पहुंच पा रहा है। विभाग इसके लिए लगातार प्रयासरत हैं कि जल्द से जल्द पर्याप्त क्षमता के साथ पानी छोड़ा जाए और किसान लाभ ले सकें।
मक्का फसल की सिंचाई और पलेवा रुकी
इन दिनों क्षेत्र के किसानों ने अगेती मक्का की फसल बो रखी है। इस फसल को पानी देने का समय है। वहीं कुछ किसान पिछैती मक्का बोने के लिए खेतों की पलेवा करने की तैयारी कर रहे हैं। इसके साथ ही धान बोआई के लिए नर्सरी तैयार करने का समय है, पर रजबहा, माइनर सूखे होने से किसान निजी नलकूपों का सहारा ले रहे हैं। इससे उनके ऊपर आर्थिक बोझ भी पड़ रहा है।

सूखा पड़ा दौलतपुर माइनर। संवाद- फोटो : AURAIYA

फफूंद रजबहा में पानी नहीं। संवाद- फोटो : AURAIYA

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