औरैया। कोटा बैराज से छोड़े गए पानी से उफनाई यमुना नदी का जलस्तर शनिवार को करीब आधा मीटर कम हो गया। इससे बाढ़ की चपेट में आए गांवों में भी पानी घटा है, लेकिन हालात सामान्य नहीं हुए। सिकरोड़ी और अस्ता गांव तो पानी से घिर गए हैं। यहां कच्चे घर गिरने लगे हैं।
करीब 22 गांवों के 100 से ज्यादा परिवार ऊंचाई पर विस्थापित किए गए हैं। उधर, शाम को कानपुर मंडल के अधिकारी ने अफसरों के साथ बाढ़ग्रस्त इलाकों का जायजा लिया।
जनपद में यमुना नदी अजीतमल और औरैया तहसील के गांवों से होकर निकलती है। हर साल बारिश में कोटा बैराज का पानी यमुना नदी में छोड़ा जाता है। लाखों क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किए जाने से यमुना खतरे के निशान के ऊपर बहने लगती है। इससे नदी की तलहटी में बसे करीब 50 गांवों 50 हजार से ज्यादा आबादी प्रभावित होती है। बीते 28 जुलाई को कोटा बैराज से तीन लाख क्यूसेक से छोड़े गए पानी से यमुना नदी जिले में रौद्र रूप दिखा रही है।
एक अगस्त दोपहर तक पानी लगातार बढ़ने से यह खतरे के निशान से कहीं चार तो कहीं पांच मीटर ऊपर तक पहुंच गया था। इससे अजीतमल तहसील के 12 और औरैया सदर तहसील के करीब 10 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए। सबसे ज्यादा हालात सिकरोड़ी व अस्ता में खराब हुए।
सिकरोड़ी गांव में बाढ़ का पानी पांच फिट से ज्यादा भर गया। इससे 60 के आसपास परिवारों को राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है। यहां हालात काबू में करने के लिए एसडीआरएफ की टीम तैनात की गई है।
अस्ता गांव भी बाढ़ से पूरी तरह घिरा हुआ है। यहां के लोगों के लिए भी प्रशासन ने राहत शिविर की व्यवस्था की है। कुछ परिवार इन शिविर में शिफ्ट भी हुए हैं। गांव में आवागमन नाव के सहारे हो रहा है। अब पानी का उफान तो थम गया है और पानी घटने लगा है, लेकिन बाढ़ के कारण यहां भी कच्चे व ईंटों के मकान गिरने का खतरा बढ़ गया है।
उधर, बाढ़ ने इस बार कानपुर सीमा के पास बसे गांवों में भी कहर बरपाया है। जिले के क्योंटरा गांव के दक्षिण हिस्से में भी पानी घुस गया। इससे कई घर पानी से घिर गए। सैकड़ों बीघा खरीफ की फसल पानी में डूब गई। शनिवार को सदर विधायक ने गांव के प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। उधर, शेरगढ़ घाट पर स्थित केंद्रीय जल आयोग कंट्रोल रूम के जेई आशीष ने बताया कि जलस्तर दोपहर 12 बजे तक 50 सेमी. जलस्तर घटा है।