ओपीडी के बाहर लगी मरीजों की भीड़। संवाद
औरैया। मौसम के मिजाज में आ रहे तेजी से बदलाव का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर दिखने लगा है। दिन में उमस भरी गर्मी और रात को तापमान में आ रही गिरावट सांस और दमा के मरीजों के लिए मुश्किलें खड़ी कर रही है। मौसम के इस उतार-चढ़ाव के कारण चिचौली मेडिकल कॉलेज में दमा के मरीजों की संख्या बढ़ी है। डॉक्टर उन्हें मौसम के अनुकूल दिनचर्या रखने की सलाह दे रहे हैं।
पिछले कुछ दिनों से लगातार रुक-रुककर हो रही बारिश के बीच हवा में नमी बढ़ी है। रात के समय हो रही बूंदाबांदी के बीच तेज हवा तापमान में गिरावट ला रही है। दो दिन से रात के समय न्यूनतम तापमान 25 डिग्री तक जा रहा है। ऐसे में दिन की गर्मी के बीच दमा रोगियों को रात में कूलर पंखे की ठंडी हवा नुकसान पहुंचा रही है।
सांस लेने में दिक्कत होने पर दमा रोगी अस्पताल पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, मौसम में आ रहे इस बदलाव की वजह से फेफड़ों में संक्रमण और सांस लेने में तकलीफ की शिकायतें बढ़ जाती हैं। विशेष रूप से बुजुर्गों और पहले से सांस की बीमारी से जूझ रहे लोगों को सावधानी बरतते हुए बचाव करना चाहिए।
इन बातों का रखें ख्याल:
कूलर और पंखे की सीधी हवा से बचें।
अचानक तापमान बदलाव से परहेज करें।
इनहेलर और दवाओं का नियमित सेवन करें।
खान-पान में रखें विशेष ध्यान।
धूल-मिट्टी और धुएं से करें बचाव।
वर्जन
ओपीडी में इन दिनों दमा रोगियों की संख्या बढ़ी है। स्टोर में इसे लेकर जरूरी दवाओं और इनहेलर मंगवा लिए गए हैं। रात के समय हो रही ठंडक और कूलर पंखे की हवा दमा रोगियों को बीमार बना रही है। सावधानी बरतने की जरूरत है।
-डॉ. पवन कुमार शर्मा, सीएमएस मेडिकल कॉलेज