मानव को संस्कृति और संस्कार ही ख्याति दिलाते हैं। दोनों के बिना मानव जीवन व्यर्थ है। प्रत्येक व्यक्ति को ईश्वर की आराधना में अपना समय व्यतीत करना चाहिए। यह बात कथा वाचक आचार्य संध्या ने भक्तों के बीच कही।
माखनपुर टीकमपुर में चल रही श्रीमद भागवतकथा ज्ञान सप्ताह ज्ञान यज्ञ समारोह के सातवें दिन भगवान श्रीकृष्ण और उद्घव की कथा सुनाई गई। कथा वाचक कुमारी संध्या शास्त्री ने कहा कि कृष्ण के प्यारे सखा और उनके शिष्य उद्घव से एक प्रश्न पूूछा गया। जिसका उत्तर दोनों ने अपने-अपने तरीके से दिया।
कथा वाचक का कहना है कि सभी के सोचने का नजरिया अलग-अलग होता है। व्यक्ति किस परिवेश में पला-बढ़ा है, यह उसके व्यवहार में झलकता है। मानव को सदाचार, आचरण और संस्कृति को भूलना नहीं चाहिए। यह मनुष्य को ख्याति के उच्च शिखर पर स्थापित करने में सहायक होती हैं। कथा श्रवण के दौरान सैकड़ों की संख्या में भक्तगण मौजूद रहे।