बिधूना (औरैया)। भगवान का स्मरण करने मात्र से परिवार व स्वयं पर आने वाली विपत्ति दूर हो जाती है। यह बात बेला रोड स्थित नदी पुल पर हो रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथावाचक पं. महेश अवस्थी ने कही। इसी प्रसंग में उन्होंने भगवान कृष्ण के जन्म का सजीव वर्णन किया।
कथावाचक पं. महेश अवस्थी ने बताया कि भगवान कृष्ण का कंस के कारागार में हुआ था। श्रीकृष्ण का जन्म होते ही कारागार के ताले स्वयं खुल गए। बंदी रक्षक गहरी नींद में सो गए। देवकी और वासुदेव की हथकड़ी व बेड़ियां खुल गईं। वासुदेव जब कृष्ण को अपने मित्र नंद बाबा के घर ले जा रहे थे, रास्ते में उन्हें यमुना नदी को पार करना था। उन्होंने जैसे ही यमुना नदी में प्रवेश किया तो नदी का जलस्तर बढ़ने लगा।
वासुदेव ने अपने पुत्र को पानी से बचाने के लिए उन्हें दोनों हाथों से ऊपर उठा लिया। फिर भी यमुना का जलस्तर निरंतर बढ़ता रहा। भगवान कृष्ण ने यमुना जी के मंतव्य को समझ लिया और अपना पैर निकालकर यमुना के जल से स्पर्श किया। इसके बाद यमुना जी साधारण रूप में आ गईं और वासुदेव नदी पार कर नंद बाबा के घर पहुंचे।
कथावाचक ने कहा कि व्यक्ति अपने कर्मों से महान बनता है। जीवन का मर्यादा पूर्ण होना बहुत जरूरी है। मर्यादा के बिना जीवन निरर्थक है। भागवत कथा में परीक्षित गिरजा शंकर पोरवाल व ज्योति पोरवाल के अलावा लक्ष्मी नारायण, जय नारायण, रामनारायण, कल्लू, सीताराम, श्याम, रामजी, कंचन, अंजली व सुनैना आदि मौजूद रहीं।