फफूंद (औरैया)। मुरादगंज मार्ग पर स्थित ग्राम ऊंचा बहादुरपुर के सुप्रसिद्ध स्थान गमा देवी के मंदिर पर चल रही श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ समारोह में अखंड कोटि ब्रह्महांड नायक परमपिता परमेश्वर की बाल लीलाओं की कथा श्रवण कराई गई। भागवत कथा सुनने के लिए ग्रामीण और क्षेत्रीय लोगों को कथा प्रागण में भक्तों का भारी जन सैलाब उमड़ रहा है।
ग्राम ऊंचा बहादुरपुर के गमा देवी मंदिर पर भागवत के पांचवे दिन सती चरित्र की कथा का बखान करते हुए वृंदावन धाम से पधारे भागवत कथा वाचक पंडित सुदीप कृष्ण देव महाराज ने भगवान शिव की अनुमति लिए बिना उमा अपने पिता दक्ष के वहां आयोजित यज्ञ में पहुंच गई। यज्ञ में भगवान शिव को निमंत्रण नहीं दिए जाने से कुपित होकर सती ने यज्ञ कुंड में आहुति देकर शरीर त्याग दिया। इससे नाराज शिव के गणों ने राजा दक्ष का यज्ञ विध्वंस कर दिया। इसलिए जहां सम्मान न मिले वहां कदापि नहीं जाना चाहिए।
ध्रुव कथा का बखान करते हुए राजा उत्तानपाद के जीवन की कथा सुनाते हुए श्रोताओं से कहा कि उत्तानपाद की पहली पत्नी सुनीति को जब कोई पुत्र नहीं जन्मा तो सुनीति ने राजा से दूसरा विवाह करने के लिए कहा। पत्नी के बार-बार आग्रह करने पर राजा ने दूसरा विवाह सुरुचि के साथ किया। कुछ समय बाद सुरुचि ने एक पुत्र को जन्म दिया तो सुनीति ने कुछ समय बाद एक पुत्र को जन्म दिया। सुरुचि के पुत्र का नाम उत्तम तो सुनिति के पुत्र का नाम ध्रुव रखा गया।
भाग्यवश एक दिन ध्रुव खेलता हुआ अपने पिता के पास पहुंचा जहां राजा उत्तम को गोद मे लिए प्यार कर रहा था। जैसे ही ध्रुव ने राजा की ओर हाथ बढ़ाया उसी समय सुरुचि बोली जिस दिन तू मेरी कोख से जन्म लेगा उसी दिन तू राजा के गोद में बैठ पाएगा। लज्जित ध्रुव रोता हुआ अपनी मं के पास पहुंचा और बोला मां राजा से भी ऊंचा किसका सिंहासन होता है। माता ने बताया भगवान का। यदि कोई सच्चे मन से किसी को पाना चाहे तो ईश्वर उसे अपने पास जगह दे देते है। आज ध्रुव आकाश में अपना नाम सार्थक कर रहा है। मानव को हमेशा सत्य के मार्ग पर चलकर मोक्ष की प्राप्ति कर लेनी चाहिये। परीक्षित डॉ. रामऔतार पाल ने सभी से कथा सुनने के लिए कहा है। आयोजकों ने बताया है कि यह कथा नौ से 17 अक्तूबर तक चलेगी। 18 अक्तूबर को पूर्णाआहुति के बाद भंडारा होगा।