औरैया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश मयंक चौहान की अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में भूमि बैनामा और धोखाधड़ी से जुड़े मामले में पुनरीक्षणकर्ता रामबाबू की दांडिक निगरानी को खारिज कर दिया है। अदालत ने अपर सिविल जज जूडि बिधूना की ओर से 28 जून 2024 को पारित उस आदेश को पूरी तरह से पुष्ट किया है, जिसके तहत परिवादी का परिवाद दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 203 के अंतर्गत खारिज कर दिया गया था।
एरवाकटरा थाना क्षेत्र के गांव रमपुरा निवासी रामबाबू ने कोर्ट में परिवाद दाखिल किया था कि उसने 28 मई 2014 को विपक्षी शिवओम से जमीन का 44,500 रुपये में बैनामा कराया था। परिवादी का आरोप था कि विपक्षी शिवओम ने वही जमीन पहले ही एक दिसंबर 2010 को रत्नेश कुमार के नाम बैनामा कर दी थी।
जब परिवादी को इस धोखाधड़ी की जानकारी हुई और वह 12 मई 2023 को रुपये वापस मांगने शिवओम के घर गया, तो वहां मौजूद अन्य विपक्षियों ने उसके साथ मारपीट की, गाली-गलौज की और धमकी दी। पुलिस की ओर से कार्रवाई न किए जाने पर उसने न्यायालय में परिवाद दाखिल किया था, जिसे निचली अदालत ने सिविल प्रकृति का मानते हुए परिवाद को खारिज कर दिया था।
शनिवार को मामले की सुनवाई के दौरान सत्र न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि परिवादी और विपक्षी शिवओम के बीच भूमि के विक्रय पत्र से जुड़ा विवाद विशुद्ध रूप से दीवानी प्रकृति का है। अदालत ने कहा कि दीवानी प्रकृति के मामलों में पक्षकारों पर दबाव बनाने के लिए फौजदारी प्रक्रिया का इस्तेमाल हथियार के रूप में नहीं किया जाना चाहिए।
अदालत ने पाया कि परिवादी के बयानों और उसके गवाहों के बयानों में विरोधाभास है। परिवाद पत्र में मारपीट का जिक्र था, जबकि बयानों में अलग-अलग तरह के आरोप लगाए गए, और मौके पर मौजूद बताए गए स्वतंत्र गवाह को अदालत में पेश नहीं किया गया।
सभी बिंदुओं पर विचार करने के बाद न्यायाधीश मयंक चौहान ने निचली अदालत के आदेश को वैध करार देते हुए पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर दी।
बहू के खिलाफ समन आदेश रद्द, मजिस्ट्रेट को दोबारा सुनवाई का निर्देश
औरैया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश मयंक चौहान की अदालत ने एक अहम फैसले में बहू स्वाति उर्फ निधी पांडेय के खिलाफ जारी समन आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की ओर से 10 सितंबर 2024 को पारित आदेश को खारिज करते हुए पत्रावली वापस भेज दी है और नए सिरे से सुनवाई कर विधिसम्मत आदेश देने का निर्देश दिया है। परिवादी ससुर राजेंद्र प्रसाद मिश्रा ने सीजेएम कोर्ट में परिवाद दायर कर आरोप लगाया था कि पुत्रवधू 8 नवंबर 2023 को जेवर व 10 हजार रुपये लेकर मायके चली गई। (संवाद)