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संक्रमित हुए पर नहीं मानी हार, निभा रहे फर्ज

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औरैया। संक्रमण से लोगों को बचाने के लिए कोरोना योद्धा पूरी मुस्तैदी से डटे हैं। खुद कोरोना संक्रमण की चपेट में आने के बाद अपना फर्ज नहीं भूले है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार नौ महीने में जिले में 96 कोरोना योद्धा संक्रमित हुए, जो स्वस्थ होकर लौटने के बाद पूरी लगन के साथ ड्यूटी कर रहे हैं।
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नौ महीनों में 3369 संक्रमितों का उपचार किया जा चुका है। जिले में पहला संक्रमित मरीज 22 मार्च को मिला था। इसके बाद एक के बाद एक कई संक्रमित मरीज जिले में मिले। जिले के प्रशासनिक और स्वास्थ्य अधिकारियों ने टीमें बनाकर कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए रणनीति बनाकर काम किया, जिसमें मुख्य चिकित्साधिकारी समेत कई स्वास्थ्य अधिकारी व स्वास्थ्य कर्मी कोरोना संक्रमण की चपेट में आए।
यही नहीं घर-घर सैंपल लेने का अभियान चलाने वाले कोरोना योद्धा भी संक्रमित हुए। स्वस्थ होने के बाद उन्होंने शरीर में कमजोरी तो महसूस की, लेकिन फर्ज को नहीं भूले। इन कोरोना योद्धा में कुछ ऐसे भी हैं, जिन्होंने परिवार से दूरियां बनाकर रखीं हुईं। नाम न छापने की शर्त पर कोरोना योद्धाओं ने बताया कि वह ड्यूटी कर रहे है, संक्रमण के डर से तीन से चार महीने में घर जाते हैं।
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एक कोरोना योद्धा ने बताया कि वह तीन महीने से कानपुर स्थित अपने परिजनों से नहीं मिले है। प्रतिदिन शाम के समय वीडियो कालिंग से परिजनों से बात होती है। बताया कि अक्सर संक्रमित मरीज के संपर्कियों के सैंपल लेने के लिए जाना पड़ता है। हालांकि एक बार संक्रमित होने के बाद की गई लगातार तीन बार की सैंपल रिपोर्ट निगेटिव आईं हैं।
जिले में संक्रमित मरीजों को भर्ती करने के लिए पहला कोविड वार्ड दिबियापुर में बना था। जिले में कोरोना संक्रमित मरीजों को भर्ती करने के लिए एल-वन कोविड केयर सेंटर दिबियापुर, एल-वन एडिशनल कोविड केयर सेंटर पीबीआरपी एकेडमी दिबियापुर, एल-टू कोविड केयर सेंटर 100 शय्या जिला चिकित्सालय चिचौली बनाया गया है। हालांकि अब इन केंद्रों पर एक भी संक्रमित मरीज नहीं हैं।
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