औरैया। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो की अदालत ने किशोरी से दुष्कर्म के मामले में आरोपी शिव सिंह को दोषी करार दिया। कोर्ट ने दोषी को 20 वर्ष के कठोर कारावास और 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड न देने पर छह महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। हालांकि, अदालत ने अपहरण के आरोपों से आरोपी को दोषमुक्त कर दिया है।
वादी ने सदर कोतवाली में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया था कि 16 सितंबर 2019 को उनकी 13 वर्षीय बेटी को बुखार आने पर उनकी पत्नी फफूंद रोड स्थित करियापुर डॉक्टर के पास दवा दिलाने ले गई थीं। वापसी में नहर के पास पत्नी ने पीड़िता को घर भेज दिया, लेकिन वह घर नहीं पहुंची थी। खोजबीन के दौरान पता चला कि गांव के ही शिव सिंह और अन्य लोगों की संलिप्तता से पीड़िता को ले गया था।
मंगलवार को दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) अखिलेश्वर प्रसाद मिश्र ने आरोपी को दोषी करार दिया। अदालत ने आदेश दिया कि वसूल किए गए अर्थदंड की कुल राशि में से 50 प्रतिशत धनराशि पीड़िता को उसके व्ययों और पुनर्वास के लिए प्रदान की जाएगी। वहीं, इससे पहले वादी ने बेटी से छेड़छाड़ के मामले में पिता-पुत्र समेत तीन के खिलाफ सदर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। अभियोजन के अनुसार, घटना तीन सितंबर 2019 की रात की है।
वादी ने पुलिस को बताया कि बेटी शौच के लिए गई थी। तभी बाइक से आए शिव सिंह, गया प्रसाद, मंजीत और एक अज्ञात व्यक्ति ने किशोरी को जबरन उठाया और धान के खेत में खींच ले गए थे। इस मामले में भी कोर्ट ने सुनवाई की। यहां भी दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद तीनों को दोषी करार दिया। अदालत ने शिव सिंह को छेड़छाड़ व पॉक्सो एक्ट में, साजिश रचने वाले पिता गया प्रसाद और मंजीत को चार साल की सजा सुनाई।
शिव सिंह को पॉक्सो एक्ट चार साल की सजा व 10 हजार रुपये अर्थदंड, छेड़छाड़ के मामले में तीन साल व पांच हजार रुपये अर्थदंड लगाया। वहीं, पिता गया प्रसाद व मंजीत साजिश में तीन-तीन साल की सजा व पांच-पांच हजार रुपये का अर्थदंड से दंडित किया। वसूल किए गए अर्थदंड की कुल राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा पीड़िता को उसके पुनर्वास और व्ययों के लिए प्रदान किया जाएगा। फैसले के बाद सभी दोषियों को न्यायिक हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया है।
पति-पत्नी के रूप में रह रहे थे दोषी व पीड़िता
अभियोजन के अनुसार दोषी ने साल 2019 में छेड़छाड़ की घटना का अंजाम दिया। पुलिस ने दोषी को पकड़कर जेल भेज दिया। जमानत पर छूटने के बाद दोषी पीड़ित को ले गया, इसके बाद दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया। तीन मामलों में दो का मंगलवार को फैसला सुना दिया गया। खास बात यह है कि तीन घटना के बाद पीड़िता व दोषी ने शादी कर ली थी, लेकिन इससे पहले पीड़िता के कोर्ट में दोषी पति के खिलाफ बयान हो चुके थे। हालांकि अब पीड़िता दोषी के पक्ष में है, जबकि पिता शुरू से ही दोषी का विरोध करता रहा।
दहेज हत्या के दोषी पति, सास, ससुर व देवर को सात साल की सजा
औरैया। अतिरिक्त दहेज में एक बाइक और 10 हजार रुपये न मिलने पर विवाहिता श्यामा देवी की गला दबाकर हत्या के मामले में पति, सास, ससुर व देवर को दोषी करार दिया गया। घटना अजीतमल कोतवाली क्षेत्र के गांव सबलपुर की थी। अपर सत्र न्यायाधीश-प्रथम, औरैया (पारूल जैन) ने पति रामवीर, ससुर सर्वेश, सास राजरानी और देवर राधे को सात साल की सजा सुनाई। वहीं, साक्ष्यों के अभाव में सह-अभियुक्त कुलदीप परिहार को दोषमुक्त कर दिया गया है। इटावा स्थित चकरनगर क्षेत्र के गांव कुंदौल निवासी श्रीकृष्ण ने अजीतमल कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उन्होंने अपनी 20 वर्षीय बेटी श्यामा देवी की शादी 17 दिसंबर 2018 को गांव सबलपुर निवासी रामवीर के साथ की थी। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने पति, ससुर, सास और देवर को दोषी करार दिया, जबकि ट्रैक्टर चालक कुलदीप परिहार को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। (संवाद)