दिबियापुर (औरैया)। भगवतीगंज के मुख्य बाजार में शिव मंदिर का जीर्णोद्धार व साथ में हो रहे दुकानों का निर्माण कार्य पुलिस व प्रशासन ने रुकवा दिया। एक शिकायती पत्र वायरल होने पर रविवार को पहुंचे अफसरों ने यह कार्रवाई की। परिवार से मालिकाना हक के कागजात मांगे गए हैं।
भगवतीगंज मुख्य बाजार में गुंजन चौराहे पर इन दिनों एक परिवार शिव मंदिर का जीर्णोद्धार करा रहा है। साथ में दुकानें भी बन रही हैं। शनिवार को लिंटर डालने के लिए शटरिंग लग गई। शनिवार रात सोशल मीडिया पर रामकृष्ण नगर निवासी धर्मेंद्र नाथ मिश्रा का 22 फरवरी को एसडीएम को दिया शिकायती पत्र वायरल हो गया। इसमें आरोप लगाया गया कि रामकृष्ण नगर में स्थित देवी मंदिर की जगह पर नगर पंचायत चेयरमैन अरविंद पोरवाल की मिलीभगत से कब्जा कर दुकानों का निर्माण कराया जा रहा है। मांग की गई कि बनवाई जा रही दुकानों को ध्वस्त किया जाए।
मामला तूल पकड़ता देख रविवार सुबह एसडीएम मनोज कुमार सिंह, तहसीलदार रनवीर सिंह, सीओ सुरेंद्र नाथ यादव, प्रभारी निरीक्षक विकास राय समेत राजस्व कर्मियों की टीम एवं पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। यहां पर मंदिर निर्माण को लेकर रिंकू पोरवाल ने बताया कि मंदिर करीब डेढ़ सौ वर्ष पुराना है। मंदिर को उनके परबाबा
छेदालाल पोरवाल ने निजी जमीन पर बनवाया है। इसके बाद बाबा मन्नीलाल से लेकर उनके स्वर्गीय पिता सुभाष और अब वे लोग लगातार चौथी पीढ़ी मंदिर की देखरेख करती आ रही है। मंदिर की जमीन के कागजात भी हैं। उन्होंने मंदिर में लगा शिलापट्ट भी अधिकारियों को दिखाया।
एसडीएम मनोज कुमार सिंह ने कागजात प्रस्तुत करने तक काम रोकने के निर्देश दिए। रिंकू पोरवाल, उनकी मां पुष्पा देवी, चाची गार्गी देवी ने बताया कि उनके परिवार की विवाहित बेटियों अनु एवं तनु ने मन्नत पूरी होने पर मंदिर निर्माण कराने के लिए कहा था। इसी के तहत मंदिर निर्माण कराया जा रहा है। यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए माली, प्रसाद एवं प्याऊ के लिए दुकानों का निर्माण कराया जा रहा है। इधर, एक ही मुहल्ले के एक के मंदिर के साथ दुकानें बनवाने एवं आसपास के लोगों के निर्माण रुकवाने के कारण तनाव की स्थिति बनी है।
बयान:
थानाध्यक्ष विकास राय ने बताया कि निर्माण को लेकर पुलिस नजर बनाए है। जब तक उच्च अधिकारियों से आदेश नहीं मिलता, शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए कहा गया है।
बयान:
नगर पंचायत चेयरमैन अरविंद पोरवाल का कहना है कि शिकायतकर्ता का मुझ पर लगाया गया आरोप निराधार है। मेरा इस निर्माण कार्य से कोई लेना देना नहीं है।