फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आम के बौर पर करें जरा गौर

Sun, 21 Feb 2016 11:37 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो औरैया
विज्ञापन
विज्ञापन
फरवरी का आखिरी हफ्ता आते-आते आम के पेड़ बौर से लद चुके हैं। ऐसे में किसानों को उनकी देखभाल करने की बहुत जरूरत है। जरा ही लापरवाही से पाउडरी, गुम्मा और भुनगा रोग उनको अपनी चपेट में ले सकते हैं। तापमान बढ़ने से इस बार समय से पहले आम के पेड़ों पर बौर आ गया है। ऐसे में बीमारी और कीट भी हमलावर हो गए है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को समय पर आम की बौर को रोगमुक्त करने की सलाह दी है।
विज्ञापन


इंसेट
पाउडरी और दहिया रोग से बचाव के उपाय
मौसम में अधिक आर्द्रता से आम के बौर के पाउडरी होने का खतरा बढ़ जाता है। इसमें पुरानी पत्तियों में सफेद जाला नुमा रोग बौर में लग जाता है। इससे बौर की वृद्धि रुक जाती है। चंद्रशेखर आजाद कृषि विवि के कृषि वैज्ञानिक डा. राजेश राय ने बताया कि पेड़ पर पाउडरी रोग दिखाई दे तो घुलनशील गंधक दो ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। डाईनोकैप एक मिली प्रति लीटर पानी घोलकर प्रथम छिड़काव बौर आने के तुरंत बाद दूसरा छिड़काव 10 से 15 दिन बाद तथा तीसरा छिड़काव उसके 10 से 15 दिन बाद कर देना चाहिए।

बौर को नष्ट कर देता है गुम्मा रोग
डा. राजेश राय ने बताया कि आम की बौर में गुम्मा रोग भी बौर को पूरी तरह नष्ट कर सकता है। ऐसे में किसान एनएए 200 पीपीएम रसायन की 900 मिलीलीटर मात्रा प्रति 200 लीटर पानी के घोल में तैयार कर छिड़काव करें। आम के बागों में कोयलिया रोग भी छोटे-छोटे फलों को खराब कर देता है। इस रोग पर नियंत्रण के लिए किसान भाई बोरेक्स या कास्टिक सोडा 10 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर प्रथम छिड़काव फल आने पर तथा दूसरा छिड़काव 15 दिन के अंतराल पर करें।
विज्ञापन


जरा सा चूके तो भुनगा खा जाएगा फल
नमी भरे मौसम में आम में भुनगा और फुदका कीट तेजी से हमला करते हैं। डा. राजेश राय बताते हैं कि भुनगा कीट से आम को बचाने के लिए एमिडाक्लोरपिड  की 0.3 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोलकर प्रथम छिड़काव फूल खिलने से पहले कर देना चाहिए। दूसरा छिड़काव फल के मटर के दाने के बराबर होने पर करें। इस दौरान कार्बारिल की चार ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए।
विज्ञापन


आम की प्रजातियां
दशहरी, लंगड़ा, चौसा, बंाबे ग्रीन, अलफांसों, तोतापरी आदि प्रमख वैराटियां बाजार में देखने को मिल जाती हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें