औरैया। सदर तहसील की ग्राम पंचायत भीखमपुर के ग्रामीणों की अधिगृहीत जमीन का मुआवजा लेखपाल की करतूतों में फंस गया है।
लेखपाल ने मुआवजे में किसानों से अपनी हिस्सेदारी तय की थी। साथ ही इसकी रिपोर्ट बनाते वक्त असली मालिक की बजाय जमीन बेचने वालों को ही मालिक बता दिया। अब ग्रामीण जमीन अपनी साबित करने के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। उनकी जमीन भी चली गई और मुआवजा भी नहीं मिल पा रहा है।
इस मामले में ग्रामीणों की शिकायत पर जिलाधिकारी ने अधिगृहीत जमीन की फाइल तलब कर ली है। इस खेल में कई लोगों के फंसने के आसार हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के लिए एनएचएआई ने गांव भीखमपुर के चेतराम की जमीन अधिगृहीत की थी। इसके बाद चेतराम ने बाकी जमीन कई लोगों को बेची। उनके बच्चों के पास भी जमीन थी। सभी ग्रामीणों को मुआवजा मिलना था।
लेखपाल ने मुआवजे की रिपोर्ट बनाने में ही पूरा खेल कर दिया। लेखपाल ने किसानों से मुआवजे में हिस्सेदारी तय कर 24 मई 2023 को जांच रिपोर्ट एडीएम को भेजी थी। इस रिपोर्ट में कई खामियां सामने आईं। इससे एडीएम ने आपत्तियां लगाकर रिपोर्ट वापस कर दी थी।
इसके बाद लेखपाल ने दोबारा जांच रिपोर्ट तैयार की। जिसमें खेल का दायरा और बढ़ा दिया। जमीन के असली मालिक (खरीदार) का नाम लिखने के बजाय जमीन बेचने वाले को ही भूस्वामी बनाकर रिपोर्ट में मुआवजे का हकदार बना दिया। जबकि जमीन पर कई खरीदारों के भवन व दुकानें बनी हैं।
इस मामले में 30 अप्रैल 2024 को रिपोर्ट तहसील से एडीएम के पास भेज दी गई। करोड़ों की जमीन हाथ से जाने के बाद मुआवजा मिलते न देख किसानों ने यह मामला जिलाधिकारी तक पहुंचाया। इसी के बाद लेखपाल के खेल की पर्तें खुलने लगीं। अब मामले की जांच हो रही। फिलहाल इस खेल में कई लोगों का फंसना तय माना जा रहा है।
यह था जमीन अधिग्रहण का मामला
भीखमपुर निवासी चेतराम की गाटा संख्या 218 में 41 डिसमिल जमीन थी। चकबंदी के बाद यह जमीन गाटा संख्या 323, 324, 558 व 559 में बदल गई। राष्ट्रीय राजमार्ग अधिग्रहण में चेतराम की गाटा संख्या 559 की 15 डिसमिल जमीन चली गई। इसके बाद चेतराम ने 26 डिसमिल में से 9.03 डिसमिल जमीन कैलाश नाथ व राम प्रकाश को बेच दी थी। उसने किसान छुन्नू बाबू, रामदत्त, कृष्णा देवी, मुंशीलाल व हरगोविंद को भी 15 डिसमिल बेच दी।
इसी बीच भूस्वामी चेतराम की मौत हो गई। बाद में जमीन चेतराम के वारिस रमेश चंद्र, राकेश चंद्र व राजकिशोर का नाम खतौनी में दर्ज हुई। इसी बीच रमेश चंद्र की भी मृत्यु हो गई। इससे उनके हिस्से की जमीन वारिसों के नाम दर्ज होनी थी, लेकिन लेखपाल ने 10 अगस्त 2021 को रमेश चंद्र के छह वारिसों को छोड़कर उनके एक बेटे अजय कुमार के नाम वरासत दर्ज कर दी और अनिल कुमार, आनंद, श्रीबेटी, पूजा, शिवालिका व संगीता के नाम छोड़ दिए।
इसके बाद लेखपाल ने अजय कुमार से अपनी पत्नी व भीखमपुर निवासी अपने निजी सहायक व एक अन्य के नाम भी 135.687 वर्ग मीटर का प्लॉट बैनामा करा लिया। जबकि मौके पर कोई जमीन नहीं थी।
मामला संज्ञान में आने के बाद राकेश कुमार, हरीकृष्ण अग्निहोत्री, पुष्पेंद्र पांडेय, श्यामनारायण मिश्रा, अशोक कुमार दीक्षित व राम प्रकाश ने डीएम व एडीएम से शिकायत की। ऐसे में फिलहाल जिन लोगों ने जमीन खरीदी थी, उनका मुआवजा फंस गया है।
पूरे मामले की जांच रिपोर्ट एसडीएम सदर से मांगी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कोई भी बख्शा नहीं जाएगा। -डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी, डीएम।