औरैया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने आईवीएफ प्रक्रिया की विफलता से संबंधित एक परिवाद खारिज कर दिया है। आयोग ने चिकित्सीय उपेक्षा और एक्टोपिक गर्भावस्था के आरोपों को निराधार पाया। स्पष्ट किया कि चिकित्सा विज्ञान के नियमों के तहत आईवीएफ में 100 फीसदी सफलता की कोई गारंटी नहीं होती। यह एक ज्ञात चिकित्सीय जटिलता है।
मोहल्ला बदनपुर निवासी प्रियांशी कटियार ने कानपुर के क्रस्टा आईवीएफ केयर हॉस्पिटल और डॉ. रुचिता शर्मा के खिलाफ परिवाद दायर किया था। उन्होंने पांच मई 2025 को 20 लाख रुपये मानसिक क्षति और आईवीएफ में हुए व्यय की मांग की थी। सुनवाई के दौरान साक्ष्यों से यह तथ्य सामने आया कि प्रियांशी कटियार को बेटा हो चुका है। इस प्रकार, मां बनने से वंचित होने के उनके सभी कथन निराधार पाए गए। आयोग ने 20 लाख रुपये की मानसिक क्षति का दावा खारिज कर दिया।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि अस्पताल ने एम्ब्रियो ट्रांसफर की पूरी प्रक्रिया नियमानुसार की थी। इसलिए, केवल प्रक्रिया असफल होने पर जमा की गई फीस या पैकेज की धनराशि वापस नहीं की जा सकती। जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष जगन्नाथ मिश्र, सदस्य अमिता निगम और सदस्य जितेन्द्र सिंह कुशवाह की बेंच ने परिवाद खारिज कर दिया। आयोग ने दोनों पक्षों को अपने-अपने वाद का खर्च खुद वहन करने का आदेश दिया।