औरैया। खीरा बेल की तरह लटकने वाला पौधा है। कृषि विज्ञान केंद्र परवाहा के कृषि वैज्ञानिक ने किसानों को खीरे की खेती कर अपनी आय बढ़ाने की सलाह दी है। उनका कहना है कि सही समय पर खीरे की बुवाई कर अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है। खीरे को सलाद में इस्तेमाल किया जाता है। इसके साथ विभिन्न कंपनियां अपने सामानों में इस्तेमाल कर बाजार में बेच रही हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र परवाहा के कृषि वैज्ञानिक डॉ. इंद्रपाल सिंह ने बताया कि खीरे के लिए शीतोष्ण व समशीतोष्ण दोनों जलवायु उपयुक्त होती हैं। इसके फूल खिलने के लिए 13 से 18 डिग्री का तापमान उपयुक्त होता है। पौधों के विकास व अच्छी पैदावार के लिए 18 से 24 डिग्री तापमान की जरूरत पड़ती है। खेत की तैयारी के लिए पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से व 3-4 जुताई कल्टीवेटर या देशी हल से करके खेत को भुरभुरा बना लेना चाहिए। आखिरी जुताई में 200 से 500 क्विंटल सड़ी गोबर की खाद मिलाकर नालियां बनानी चाहिए।
एक हेक्टेयर में बुवाई के लिए लगभग दो से 2.5 किलोग्राम बीज उपयुक्त होता है। फसल से जब खाने योग्य फल मिलने लगे तो सप्ताह में दो बार तुड़ाई करनी चाहिए। तुड़ाई लगातार करते रहना चाहिए, जब तक फल मिलते रहें। किसान जितना मुलायम फल बाजार में बेचने के लिए जाएगा, उतना ही अच्छा पैसा मिलता है। खीरे की बुवाई करने के लिए नवंबर से दिसंबर माह में नर्सरी तैयार करने का उपयुक्त समय है। नर्सरी तैयार होने पर जनवरी से फरवरी तक इसकी बुवाई की जाती है। बुवाई के लिए खेत की तैयारी के बाद 50 सेंटीमीटर चौड़ी एक से 1.5 मीटर की दूरी पर 25 से 30 सेंटीमीटर गहरी नालियां तैयार करें।