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Auraiya News: जिलाबदर सामोद यादव की प्रधानी बहाल, तत्कालीन डीडीओ, जेई व सचिव पर कार्रवाई

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औरैया। अछल्दा ब्लॉक की ग्राम पंचायत घसारा में विकास कार्यों में हुए भ्रष्टाचार मामले में जिलाबदर ग्राम प्रधान सामोद यादव, निलंबित सचिव व जेई को दोषी मानते हुए जिला मजिस्ट्रेट ने आदेश जारी किया है। तीनों से दुरुपयोग की गई धनराशि को ग्राम सभा के खाते में दर्ज कराने, सचिव व जेई की एक वर्ष के लिए अस्थाई तौर वेतन वृद्धि रोकने व ऐसे कृत्य की पुनरावृत्ति न होने के प्रतिबंधों के साथ ही जिलाबदर सामोद यादव की प्रधानी बहाल करने का आदेश दिया है। तत्कालीन जिला विकास अधिकारी सत्यपाल यादव को समय से अभिलेख प्रस्तुत न करने का दोषी पाया है। जिन पर एक वर्ष के लिए देय वेतन वृद्धि एक वर्ष के लिए अस्थाई तौर पर रोकने का भी आदेश दिया है।
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साल 2021 के पंचायत चुनाव में अछल्दा की घसारा ग्राम पंचायत से सामोद यादव प्रधान चुने गए। चुनाव कार्यकाल के दो वर्ष बीतने के बाद गांव निवासी कुछ लोगों ने वित्तीय वर्ष 2021-22 व 2022-23 में आवास व शौचालय आवंटन समेत अन्य विकास कार्यों में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए शपथ पत्र दिए गए। जांच रिपोर्ट के आधार पर ग्राम प्रधान सामोद यादव को निलंबित कर दिया गया। प्राथमिक जांच में दोषी पाते हुए जिला प्रशासन ने साल 2024 के शुरुआती दौर में अधिकार छीन लिए। वहीं सचिव सुनील कुमार यादव को भी निलंबित कर दिया गया। वहीं जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला मजिस्ट्रेट कोर्ट में वाद भी दर्ज किया गया।
इसी बीच अगस्त 2024 में सामोद यादव पर मुकदमों की फेहरिस्त को लेकर गुंडा एक्ट की कार्रवाई के तहत छह माह का जिलाबदर लगा दिया गया। सुनवाई के बीच उच्च न्यायालय में सामोद यादव की ओर से याचिका दायर की गई। तीन माह के अंदर सुनवाई का आदेश हुआ। आखिरकार 23 अक्तूबर को जिला मजिस्ट्रेट डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने उच्च न्यायालय की रिट का हवाला देते हुए आदेश जारी किया। जिसमें तत्कालीन ग्राम प्रधान सामोद यादव, सचिव सुनील कुमार यादव व अधिशासी अभियंता शांति स्वरूप को गबन का दोषी पाया। दुरुपयोग की गई कुल धनराशि 14,386 रुपये की तीनों से वसूली करते हुए ग्राम निधि के खाते में डालने के आदेश दिए हैं।
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ग्राम पंचायत में विकास कार्यों के मामले में आदेश जारी किया है। दुरुपयोग की गई धनराशि की वसूली के साथ ही प्रतिबंधों के आधार पर प्रधानी बहाल की गई है। ग्राम प्रधान पर गुंडा एक्ट की भी कार्रवाई है। -डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी, जिला मजिस्ट्रेट
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