औरैया। जिले के आयुष्मान कार्ड धारकों को इलाज के लिए कानपुर, इटावा जैसे शहरों की दौड़ लगानी पड़ रही है। जिले भर में सिर्फ एक प्राइवेट अस्पताल ही ऐसा है, जिससे सरकार का टाईअप है।
इस अस्पताल में भी गंभीर बीमारियों की सर्जरी नहीं होती। ऐसे में मरीज दूसरे शहरों में इलाज कराने को मजबूर हैं। जिले में आयुष्मान कार्ड बनाने का काम चल रहा है। अभी 70 वर्ष से अधिक आयु के मरीजों के आयुष्मान कार्ड बनाए जा रहे हैं। वहीं, 373083 आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं, लेकिन समस्या इलाज को लेकर है।
आयुष्मान कार्ड से इलाज के लिए जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज व सात सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अनुबंधित हैं, पर इनमें सुविधाओं का अभाव रहता है। यहां से गंभीर मरीज कानपुर या सैफई रेफर कर दिए जाते हैं। सरकारी अस्पतालाें में इलाज न होने की स्थिति में मरीज परेशान न हों, इसके लिए प्राइवेट अस्पतालों से अनुबंध किया जाता है।
उधर, जिले में सिर्फ एक ही प्राइवेट अस्पताल है, जो इसके लिए अनुबंधित है, लेकिन यहां भी गंभीर बीमारियों की सर्जरी नहीं होती। इसके अलावा औरैया शहर व फफूंद का एक नेत्र चिकित्सालय भी अनुबंधित है।
जनरल मेडिसिन का एक ही अस्पताल होने से गंभीर मरीजों को परेशानी आती है। ऐसे में मरीजों को इलाज के लिए कानपुर, इटावा, ग्वालियर तक चक्कर लगाना पड़ रहा है।
इतना है लक्ष्य
शासन ने जिले को 664299 आयुष्मान कार्ड बनाने का लक्ष्य प्रदान किया है। अभी तक लगभग आधे आयुष्मान कार्ड ही बन सके हैं। अधिकारियों का कहना है कि नये कार्ड बनाने के लिए लगातार शिविर लगाए जा रहे हैं।
जनरल मेडिसिन का अभी एक ही अस्पताल आयुष्मान कार्ड से इलाज के लिए अनुबंधित है। नये अस्पताल बन रहे हैं, जल्द ही और अस्पताल भी अनुबंधित कराए जाएंगे।
- डॉ. शिशिर पुरी, डिप्टी सीएमओ