दिबियापुर। औरैया विधानसभा सीट पर आजादी से अब तक 17 विधायक चुने गए। लेकिन भाजपा प्रत्याशियों को केवल दो बार ही जीत मिली। 2017 के चुनाव में मिली जीत पार्टी एक बार भी दोहराना चाहती है। यही कारण है कि इस सीट पर प्रत्याशी के चयन में पार्टी फूंक-फूंककर कदम रख रही है।
औरैया विधानसभा सीट पर 1952 में पहला चुनाव हुआ था। तब से लेकर वर्ष 2007 तक यह सीट सामान्य रही। इसके बाद बदले परिसीमन में अजीतमल विधानसभा सीट को समाप्त कर दिबियापुर विधानसभा सीट का गठन कर दिया गया।
इसी के साथ औरैया विधानसभा सीट को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दिया गया। औरैया विधानसभा सीट पर वर्ष 1952 में हुए पहले चुनाव में इंडियन नेशनल कांग्रेस के सत्यनारायण दत्त दुबे विधायक बने। यहां से चार बार इंडियन नेशनल कांग्रेस के प्रत्याशी जीते। दो बार समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की। जबकि बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशियों ने भी दो बार जीत दर्ज की।
वर्ष 2017 के चुनाव में मोदी लहर के कारण औरैया जिले की तीनों सीटों पर भाजपा के प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की थी। औरैया विधानसभा से रमेश दिवाकर जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। इससे 21 साल पहले वर्ष 1996 में हुए 13वीं विधानसभा के लिए चुनाव में ही भाजपा के लालसिंह वर्मा जीत पाए थे।
अब इस बार के चुनाव में भाजपा के लिए इस सीट पर जीत सहेजे रखना बड़ी चुनौती है। यही कारण है कि इस सीट पर प्रत्याशी के चयन में पार्टी विशेष सावधानी बरत रही है। औरैया जिले की तीन में से दो सीटों दिबियापुर एवं बिधूना पर भाजपा अपने प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। लेकिन अभी तक औरैया सदर सीट पर प्रत्याशी घोषित नहीं कर पाई है। (संवाद)