बिधूना। फागुन में जेठ जैसी गर्मी का असर फसलों पर दिखाई देने लगा है। बढ़े तापमान के कारण गेहूं और सब्जी की फसलें भी प्रभावित होने की आशंका है।
तापमान बढ़ने से कृषि वैज्ञानिक और किसान गेहूं का उत्पादन कम होने और गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका जता रहे हैं।
तहसील क्षेत्र में गेहूं का क्षेत्रफल इस बार अधिक है।
ऐसे में तापमान में वृद्धि के कारण फसल पर 10 से 25 फीसदी तक उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। पिछले साल के मुकाबले जिले के तापमान में 4 से 7 डिग्री सेल्सियस बढ़ा हुआ है।
पिछले साल मार्च माह में न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस रहा था। जबकि इस बार न्यूनतम तापमान अभी से ही 21 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम और अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया है।
कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि प्रतिदिन बढ़ते व घटते तापमान से न केवल गेहूूं की फसल का उत्पादन प्रभावित होगा, बल्कि टमाटर, भिंडी, बैंगन, तरबूज आदि की फसलें भी प्रभावित होगी।
कृषि वैज्ञानिकों का मानना है। कि जिन किसानों ने 15 नवंबर से पहले गेहूं की फसल बो दी थी। उनमें 10 फीसदी उत्पादन प्रभावित हो सकता है। 15 नवंबर के बाद बोई गेहूं की बोई गई फसल में 25 फीसदी उत्पादन प्रभावित होने का अनुमान है।
किसान महेश चंद्र शाक्य ने बताया कि इस बार मार्च में जिस तरह से गर्मी पड़ रही। इससे सब्जी उत्पादन में भारी गिरावट होगी। ऐसे में सब्जियों में अधिक पानी लगाना पड़ सकता है।
किसान शिवमंगल सिंह ने बताया कि लगभग 80 बीघा गेहूं की फसल है। मार्च में बढ़ते तापमान से पैदावार घट सकती है। गर्मी के चलते गेहूं पतला होने की संभावना है।
किसान मनोज कुमार यादव ने बताया कि 50 बीघा खेत में गेहूं कि फसल बोई है। तापमान बढ़ने से फसल को नुकसान हो रहा है। गेहूं का दाना भी अब छोटा निकलेगा, इससे गुणवक्ता भी अच्छी नहीं मिलेगी।
किसान जगराम सिंह ने बताया कि आठ बीघा खेत में गेहूं की फसल की है, लेकिन फसल का दाना गर्मी अधिक पड़ने के कारण पतला होने लगा है। ऐसे में गेहूं की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
गर्मी के कारण गेहूं की फसल को नुकसान होने की संभावना है। पिछैती के गेहूं की फसल में अधिक नुकसान हो सकता है। - डॉ.अनंत कुमार, प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र