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स्वास्थ्य विभाग: करोड़ों के घोटाले में शांत बैठ गए अफसर

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औरैया। 100 शैया अस्पताल में हुए करोड़ों के घोटाले में जिले के अफसर चुप्पी साधे बैठे हैं। तत्कालीन सीएमएस और बीपीएम पर फर्जी फर्मों के माध्यम से सरकारी धन डकारने के आरोप हैं। सीएमओ ने रिपोर्ट दर्ज कराई, आयकर से लेकर एसआईटी तक की जांच शुरू हुई। इसके बाद अब अफसर सुस्त पड़ गए हैं और कार्रवाई ठंडे बस्ते में है।
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कोरोना काल में शासन से स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त कर मरीजों को बेहतर सेवाएं देने के लिए 100 शैया अस्पताल को करोड़ों का बजट आवंटित हुआ था। बजट में हेरफेर की आशंका पर जिलाधिकारी सुनील कुमार वर्मा ने एडीएम रेखा एस चौहान की अध्यक्षता में चार सदस्यीय टीम गठित करके जांच के निर्देश दिए थे। वित्तीय वर्ष 2020-21 में करीब दो करोड़ रुपये का हेरफेर मिला। इसमें तीन फर्मों को फर्जी बिलों के माध्यम से भुगतान किया गया था।
यह जांच चल ही रही थी कि वित्तीय वर्ष 2019-20 में एक करोड़ 19 लाख से अधिक की हेराफेरी सामने आई। जिन बिलों से भुगतान किया गया था, उनमें जीएसटी नंबर फर्जी मिले थे। करोड़ों रुपये का भुगतान फर्जी तरीके से तीन फर्मों को किए जाने पर जांच एसआईटी और आयकर को दी गई। विभागीय अधिकारियों ने जांच शुरू की।
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इधर, प्रकरण में सीएमओ डॉ. अर्चना श्रीवास्तव ने बीपीएम आदेश कुमार के खिलाफ सदर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। साथ ही तत्कालीन सीएमएस डॉ. राजीव रस्तोगी पर कार्रवाई की संस्तुति शासन से की थी। पांच माह से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी है। अब मामला ठंडा पड़ गया है।
इस तरह हुआ था भुगतान
तत्कालीन सीएमएस और बीपीएम ने मिलकर 60 बिलों पर एक करोड़ 67 लाख 89 हजार 854 रुपये का भुगतान सन फैसिलिटी फर्म को किया। इन बिलों में महीना अंकित नहीं था और न ही बिल प्रमाणित किए गए थे। इसके साथ ही दो वाशिंग मशीन होने के बाद भी आठ लाख 94 हजार 600 रुपये का भुगतान चादर धुलाई के नाम पर उन्नाव की तीन फर्म मेसर्स नमन इंटरप्राइजेज, मेसर्स शिवांगी इंटरप्राइजेज व काली इंटरप्राइजेज को किया गया।
जननी व शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत लाभार्थियों को दो लाख 98 हजार 800 रुपये का भुगतान दर्शाया गया, इनकी पत्रावलियां गायब मिली थीं। अन्य मदों में भी बिना टेंडर के कई बिलों का भुगतान किया गया। इसके साथ ही अन्य माध्यमों से एक करोड़ से ऊपर के भुगतान बिना जीएसटी वाले बिलों पर किया गया था।
इन धाराओं में दर्ज हुआ था मुकदमा
सीएमओ ने तत्कालीन सीएमएस डॉ. राजीव रस्तोगी व लिपिक आदेश कुमार को घोटाले का दोषी माना था। सदर कोतवाली में बीपीएम आदेश कुमार के खिलाफ धारा 409, 420, 467, 468, 471 के तहत मुकदमा दर्ज कराया था।
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